घाघरा नदी की कटान का कहर जारी है। कंचनापुर गांव में बनी मस्जिद समेत आठ घर मंगलवार को नदी की धारा में और समा गए हैं। पिछले 36 दिनों से तटबंधों पर जिंदगी गुजार रहे बाढ़ पीड़ितों के सामने समस्याओं के ढेर लगे हुए हैं लेकिन इनकी समस्याओं का हल निकल नहीं पा रहा है। सरकारी कर्मचारियों की उपेक्षा इन पर भारी पड़ रही है जिससे इनके सामने दो वक्त की रोटी और मवेशियों के चारे जुटाना काफी मुश्किल हो गया है।
घाघरा नदी का पानी घटने लगा है इसके बाद भी नदी का पानी खतरे के निशान से 56 सेमी ऊपर बह रहा है। वहीं नदी द्वारा सूरतगंज क्षेत्र में कंचनापुर के निकट की जा रही कटान लगातार जारी है। जिससे नदी की धारा में आकर मस्जिद समेत लुकमान, मोहर्रम अली, हाजी मुल्ला, अजीम, परसादी, राम आधार, गुलाम अली और अल्ताफ के मकान नदी की धारा में समा गए हैं। यह सभी बाढ़ पीड़ित पिछले 36 दिनों से हेतमापुर तटबंध पर परिवारीजनों के साथ तिरपाल के नीचे जीवन गुजार रहे हैं। मंगलवार को विधायक रामनगर शरद अवस्थी एसडीएम अभय पांडेय के साथ सोमवार को बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे। बाढ़ पीड़ितों ने आने वाली दिक्कतों से अवगत कराया।
नदी में बह गया सब कुछ
टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार एल्गिन चरसड़ी और अलीनगर रानीमऊ तटबंध में बसे परसावल, नैपुरा, कमियार, बांसगांव, लिलार आदि गांवों के बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि घरों के रखा राशन और मवेशियों का चारा नदी अपने साथ बहा ले गई। जो राशन था वह सब कुछ खत्म हो गया है। एक माह पहले जब मुख्यमंत्री का कार्यक्रम लगा था तब राहत सामग्री दी गई थी इसके बाद कोई दोबारा हाल तक जानने नहीं आया है।