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Barabanki News: जेल में निरुद्ध महिला बंदियों के बच्चों की पढ़ाई शुरू

Tue, 24 Jun 2025 12:18 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। सलाखों के पीछे बंद महिलाओं के मासूम बच्चों के भविष्य पर जेल की दीवारें बोझ नहीं बनेंगी। जिला कारागार प्रशासन इन बच्चों की शिक्षा और परवरिश की पूरी जिम्मेदारी उठा रहा है। जेल में अपनी माताओं के साथ रहने वाले चार बच्चों का दाखिला शहर के एक निजी स्कूल में कराया गया है। पढ़ाई-लिखाई से लेकर स्कूल तक जाने-आने की व्यवस्था भी जेल प्रशासन बतौर अभिभावक कर रहा है। ताकि बच्चों का भविष्य अंधेरे में न डूबे।
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जिला कारागार में फिलहाल करीब 40 महिला बंदी निरुद्ध हैं। जेल मैनुअल के अनुसार छह साल तक की उम्र के बच्चे अपनी मां के साथ जेल में रह सकते हैं। वर्तमान में चार बच्चे अपनी माताओं के साथ सलाखों के भीतर हैं। इन बच्चों को जेल प्रशासन ने निजी स्कूल में दाखिला दिलवाया है। बंदी कल्याण कोष से उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च उठाया जा रहा है। बच्चों को स्कूल तक लाने और वापस ले जाने के लिए एक महिला सुरक्षाकर्मी की ड्यूटी लगाई गई है। बच्चे हर दिन रिक्शे से स्कूल जाते हैं और स्कूल बंद होने पर मां के पास वापस लौट आते हैं।
जेल अधीक्षक कुंदन कुमार के मुताबिक इन बच्चों के पोषण और शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और उनके रहन-सहन की समीक्षा हर दिन की जाती है, ताकि कोई कमी न रह जाए।
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महिला बंदियों को ब्यूटीशियन बनने का मौका
जेल प्रशासन सिर्फ बच्चों की ही नहीं, बल्कि महिला बंदियों के भविष्य को भी संवारने की कवायद में जुटा है। इसके लिए कौशल विकास मिशन के तहत जेल प्रशासन ने महिला बंदियों को ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
सहमति देने वाली महिला बंदियों को जेल में ही यह प्रशिक्षण मिलेगा ताकि वह रिहा होने के बाद आत्मनिर्भर बन सकें। जेल अधीक्षक का कहना है कि यह प्रशिक्षण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा और बाहर निकलने पर उन्हें रोजी-रोटी के लिए दूसरे पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा।
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