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परीक्षा शुल्क के 20 करोड़ डकारने की तैयारी

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बाराबंकी। कोरोना काल में शिक्षकों को मानदेय व हालत खस्ता होने की बात करने वाले स्कूल व कॉलेज बिना परीक्षा के वसूले परीक्षा शुल्क से लखपति हो गए हैं। पूरे जिले की बात करें तो औसतन परीक्षा शुल्क पांच सौ रुपये मान लिया तो भी परीक्षा शुल्क के नाम पर वसूले गए करीब 20 करोड़ रुपये स्कूल-कॉलेज डकारने की फेर में हैं। इसमें से करीब चार करोड़ रुपये तो बोर्ड परीक्षा का माध्यमिक शिक्षा विभाग के खाते में जमा किया गया है।
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जिले में कक्षा एक से लेकर पांच तक के 3344 विद्यालय में चार लाख 67 हजार छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इसमें एक लाख 13 हजार तो मांटेसरी स्कूल में पढ़ाई करते हैं। इसी प्रकार कक्षा छह से 12 तक के 11 65 जूनियर व माध्यमिक विद्यालयों में साढ़े तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें जहां सरकारी विद्यालयों में 92 हजार तो दो लाख 58 हजार विद्यार्थी निजी शिक्षण संस्थाओं में मोटी फीस अदा कर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में बोर्ड के अलावा परीक्षा शुल्क भले ही नहीं लिया जाता।
मगर, मांटेसरी स्कूल कक्षा एक से लेकर 12वीं तक मुख्य परीक्षा के साथ मासिक परीक्षा तक के लिए परीक्षा शुल्क के नाम पर मोटी रकम वसूल करते हैं। हमेशा की तरह इस बार कोविड-19 को लेकर भले ही परीक्षा न कराई गई हो। मगर, परीक्षा परिणाम तैयार करने की बात बताकर सभी विद्यार्थियों से विद्यालय प्रशासन ने पांच से लगाकर 1200 रुपये तक का परीक्षा शुल्क वसूल किया।
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अगर पांच सौ रुपये परीक्षा शुल्क का औसत मान लिया जाए तो निजी विद्यालयों ने करीब पौन चार लाख बच्चों से करीब 19 करोड़ रुपये वसूल किए। जबकि बोर्ड परीक्षा के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 71,248 छात्र-छात्राओं के परीक्षा शुल्क की करीब चार करोड़ की राशि माध्यमिक शिक्षा परिषद के खाते में जमा कर दी गई। मेहनत-मजदूरी कर अभिभावकों के द्वारा परीक्षा शुल्क के नाम पर जमा की गई करोड़ की राशि परीक्षा न होने पर स्कूल-कॉलेज से लेकर बोर्ड तक हजम करने की फिराक में हैं।
नामचीन कॉलेजों की तो निकली लाटरी
शहर के नामचीन विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या हजार से ऊपर है। उनमें सेंट एंथोनी, आनंद भवन, बाबा गुरुकुल एकेडमी, सेंट्रल एकेडमी, सैनिक पब्लिक स्कूल, एमबी कॉलेज, यंग स्ट्रीम, रामसेवक यादव इंटर कॉलेज, महारानी लक्ष्मी बाई, श्री सांई इंटर कॉलेज, पायनियर मांटेसरी, सरस्वती इंटर कॉलेज, बाला जी का बचपन, फाउंडेशन, आनंद विहार, आवासीय शिवराम सिंह, सेठ एमआर जयपुरिया, सागर नर्चर, रायल ब्लू पब्लिक स्कूल व किंग जार्ज आदि हैं।
बिना परीक्षा कराए वसूल किए गए परीक्षा शुल्क का नीतिगत मामला है। जुलाई में विद्यालय खुलने के बाद कोविड काल में जो गतिविधियां नहीं हुई हैं। उनका विद्यालयों द्वारा वसूला गया शुल्क आगे के शिक्षण शुल्क में समायोजित कराया जाएगा।
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-राजेश कुमार वर्मा, डीआईओएस
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