पिसावां। मूड़ाखुर्द के रामलीला मैदान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान प्रवाचक आचार्य गौरव महाराज ने सती चरित्र व भक्त ध्रुव का प्रसंग सुनाया। आचार्य ने कहा कि भगवान शिव की अनुमति लिए बिना माता सती अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ में पहुंच गईं। यज्ञ में भगवान शिव को निमंत्रण नहीं दिए जाने से कुपित होकर सती ने यज्ञ कुंड में प्राणों की आहुति दे दी।
उन्होंने कहा कि जहां सम्मान न मिले वहां नहीं जाना चाहिए। भक्त ध्रुव का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि ध्रुव की सौतेली मां ने ध्रुव को पिता की गोद में बैठने से मना कर दिया। ध्रुव जी को बात लग गई और अपनी मां से कहा कि हम वन में जाकर तप करेंगे। मन दृढ़ करके वह वन में गए और पांच वर्ष की आयु में भगवान की प्राप्ति की। कथा श्रवण के लिए तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे। (संवाद)