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बात दिल की किसी से कहा मत करो...

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बाराबंकी के देवा मेला ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में कविता पाठ करते कवि। संवा - फोटो : BARABANKI
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देवा (बाराबंकी)। महोत्सव के ऑडिटोरियम में शनिवार की रात कवियों के नाम रही। मौका था देवा मेला में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का, जिसमें कवियों ने एक से बढ़कर एक कविता प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर की। इस दौरान पूरा पंडाल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा।
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कार्यक्रम की शुरुआत मां वीणा वादिनी के गीत से हुई। इसके बाद पंडित नजर इलाहाबादी ने पढ़ा कि आंखों में आंसू भी होंगे जज्बात आने दो, पूरे सब सपने होंगे रात तो आने दो। गड्ढों से मुक्त सड़क होगी, ये वादा मेरा है सारे गड्ढ़े भर जाएंगे, बरसात तो आने दो। इसके बाद अखंड प्रताप सिंह लखनऊ ने अपनी रचना जीवन की ये पतंग सांसों की डोर संग सपनों की ले उड़ान भरे ख्वाहिशों के रंग सुनाई।
इटावा से आए कवि डॉ. कुमार मनोज ने कहा कि घड़ा जब पाप का भरने लगे तो फूटना अच्छा, न रिश्ते में रहे गर्मी तो पीछा छूटना अच्छा। डॉ. श्वेता श्रीवास्तव लखनऊ ने अपनी गजल बात दिल की किसी से कहा मत करो, भावनाओं में यूं ही बहा मत करो। लुत्फ भी लड़खड़ाने का जाता रहे, चाल इतनी संभल कर चला मत करो सुनाकर वाहवाही लूटी।
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दिल्ली से आए कवि मनोज मिश्र कप्तान ने कहा कि अगर डरते रहे यूं ही तो पापी नोच खाएंगे। वहीं पर बल दिखा देंगे जहां कमजोर पाएंगे। उठो मां चंडिके बनकर गिरा दो काट बाजू को, तुम्हें हर पल बचाने को कहां तक कृष्ण आएंगे। रायपुर से आए गीतकार रमेश विश्वहार नें सुनाया कि आपसे रस्मो राह कर लेंगे, दिल की दुनियां तबाह कर लेंगे, हम कहीं देवता न हो जाएं एहतियातन गुनाह कर लेंगे।
जबलपुर से आईं कवियत्री मणिका दुबे ने सुनाया कि हाल दिल का छिपाना नहीं आएगा, कौन तुम सा तराना नहीं गाएगा। आज मुस्कान की तुमने तारीफ की, अब मेरा मुस्कुराना नहीं जाएगा। इसके अलावा कवियत्री प्रियंका शुक्ला, विनय शुक्ल, कवि सुदीप भोला ने भी काव्य पाठ किया।
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