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Barabanki News: डॉक्टरों का खेल, जेनरिक दवाओं का फार्मूला फेल

Sat, 19 Aug 2023 11:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। नेशनल मेडिकल काउंसिल ने ब्रांडेड दवाएं लिखने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों के डॉक्टर जेनरिक दवाओं के बजाए अन्य कंपनियों की दवाएं बाहर से लिख रहे हैं और मजबूरी में मरीज ये दवाएं महंगे दामों पर मेडिकल स्टोराें से खरीद रहे हैं। जबकि जनऔषधि केंद्रों पर जेनरिक दवाएं 80 फीसदी तक कम दामों पर मिलती हैं। डाॅक्टरों की मनमानी का नतीजा है कि एनएमसी का यह फार्मूला पूरी तरह से फेल होता नजर आ रहा है।
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सूत्रों की माने तो सरकारी अस्पताल का एक डॉक्टर एक दिन में कम से कम एक से डेढ़ लाख रुपये की दवाएं बाहर से लिखता है। यहां पर गौर करने वाली बात यह है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी जाने वाली ये दवाएं सिर्फ उसी मेडिकल स्टोर पर मिलेंगी जहां मेडिकल रिप्रजेंटेटिव बताएगा। डाॅक्टर, एमआर और मेडिकल स्टोर की तिकड़ी मरीजों की सेहत और जेब दोनों पर भारी पड़ रही है, लेकिन इस तिकड़ी पर रोक लगाने में शासन और प्रशासन नाकाम है।
जिला अस्पताल का हाल
बाहर से लिख दी 300 की दवाएंपिछले एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित हूं निजी चिकित्सक को दिखाया लेकिन फायदा न होने पर जिला अस्पताल आया था। तीन दवाएं अंदर से और करीब चार दवाएं 300 रुपये की बाहर से लिख दी, जिन्हें खरीदना मजबूरी था।
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मनमोहन, देवखरिया

बाहर से मंगाई बुखार की दवाएं
पिछले तीन दिनों से बुखार आ रहा है, निजी चिकित्सक काे दिखाया तो उसने जिला अस्पताल भेज दिया। चिकित्सक ने देखा बगल में बैठे युवक ने तीन दवाएं अंदर से और करीब 450 रुपये की दवाएं बाहर से लिख दी।
वंशराज, सरसंडा

करीब एक महीने से पेट में दर्द हो रहा है अल्ट्रासाउंड भी कराया लेकिन कोई आराम नहीं मिला। जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाया तो वह बोलते गए और पास बैठे व्यक्ति ने जो पर्चा दिया उसमें करीब 225 रुपये की दवाएं बाहर से लिखी थी।
सरिता देवी, बजहा

355 रुपये की दवाएं बाहर से खरीदी
बुखार आ रहा है आंख भी दर्द कर रही है। शनिवार को अस्पताल में चिकित्सक को दिखाया तो दो पर्चिंयां दी इनमें दवाएं लिखी थी। कहा कि एक पर्ची की दवा बाहर की है लाकर दिखा लो। करीब 355 रुपये की दवाएं बाहर से खरीदी।
अनीता देवी, शेषपुर अलीपुर

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का हाल
हर बार लिखी जाती हैं बाहर की दवाएं
टिकैतनगर सीएचसी पर बुखार की दवा लेने आए जयप्रकाश बताते हैं कि जब भी दवा लेने आता हूं तीन चार सौ रुपये की दवाएं बाहर से लिख दी जाती हैं। जैदपुर सीएचसी पर दवा लेने आई भगवती देवी ने बताया कि पेटदर्द होने पर करीब 350 रुपये की दवाएं बाहर से मंगाई। त्रिवेदीगंज सीएचसी पर आए मुन्ना ने बताया कि प्रसव पीड़ा पर पत्नी को दिखाने लाया था 455 रुपये की दवाएं बाहर से लिख दी।
हैदरगढ़ सीएचसी पर बुखार की दवा लेने आए रंजीत ने बताया कि पेटदर्द होने पर करीब 355 रुपये की दवाएं बाहर से मंगाई। रामसनेहीघाट सीएचसी पर दवा लेने आए अनुरुद्व ने बताया कि बुखार होने पर करीब 250 की दवा बाहर से मंगाई। मथुरानगर सीएचसी पर दवा लेने आए गुफरान ने बताया कि कान दर्द की दवां 330 रुपये की बाहर से मंगाई। सतरिख सीएचसी पर पेट दर्द की दवा लेने आए सुधा के पति ने बताया कि उसे भी करीब 350 रुपये की दवाएं बाहर से लिखी गई।

क्यों नहीं लिखते डॉक्टर जेनरिक दवाएं
जनऔषधि केंद्र के संचालक डॉ. अमित वर्मा बताते हैं ब्रैंडेड दवाओं की अपेक्षा जनेरिक दवाएं करीब 80 फीसदी तक सस्ती हैं और काफी फायदेमंद भी हैं। लेकिन डॉक्टर जनेरिक दवाएं लिखने के बजाए कंपनी के नाम वाली दवाएं लिखते हैं क्योंकि इससे उनको लाभ होता है।

नेशनल मेडिकल काउंसिल के आदेश का अनुपालन करने के निर्देश सभी चिकित्सकों को दिए गए हैं। अस्पताल में पर्याप्त दवाएं हैं इसके बाद भी यदि दवाएं बाहर से लिखी जा रही है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल

एनएमसी ने ब्रैंडेड दवाओं लिखने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है इससे सभी चिकित्सकों को अवगत कराते हुए निर्देश दिए गए हैं कि वह किसी भी हाल में बाहर की दवाएं न लिखे। इसके बाद भी चिकित्सक बाहर से दवाएं लिख रहे हैं जो पूरी तरह से गलत है इसकी जांच कराई जाएगी।
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डॉ. डीके श्रीवास्तव, प्रभारी सीएमओ
रिपोर्ट-अरुण पाठक , दिनेश प्रताप सिंह, रामकुमार यादव, पंकज शुक्ला, प्रभात अवस्थी, प्रशांत मिश्रा और जितेंद्र वर्मा।
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