बाराबंकी। डेंगू और बुखार का प्रकोप दिन-ब-दिन गहरा होता जा रहा है। रोग की चपेट में आकर लोगों की जान भी जाने लगी हैं। इसके अलावा सैकड़ों की संख्या में प्रतिदिन बुखार से पीड़ित मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं लेकिन विभाग इस रोग पर रोक लगा पाने में नाकाम है। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम नम होते ही डेंगू का प्रकोप कम हो जाता है परंतु डेंगू वायरस कम होने के बजाय तेजी से बढ़ रहा है।
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सा अधीक्षक व वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. राजेश कुशवाहा बताते हैं कि ओपीडी में कई मरीज डेंगू के जैसे लक्षण वाले आए। इनकी जब एलाइजा जांच कराई गई तो डेंगू नहीं निकला। बताया कि इस बार डेंगू वायरस के स्वरूप में कुछ बदलाव आया है जिसकी वजह से दवाएं भी कारगर साबित नहीं हो पा रही हैं।
बुखार और डेंगू से कई पीड़ित
जैदपुर कस्बा निवासी हारून भी डेंगू रोग की चपेट में आ गए हैं। हालत बिगड़ने पर लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा जिला अस्पताल में शनिवार को सबसे ज्यादा बुखार के करीब 129 मरीज देखे गए। इनमें डेंगू जैसे लक्षण वाले सात मरीज मिलने पर उनका ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजा गया।
डेंगू बुखार के लक्षण
तेज बुखार आना, जोड़ों में दर्द, सिर दर्द, मितली, उल्टी, कमजोरी और बुखार की तीव्रता होने पर लाल चकत्ते पड़ जाना। ज्यादा तेज होने पर खून की उल्टी होना, लैट्रिन के रास्ते काला व ताजा खून आना।
बचाव के उपाय
मच्छर से बचाव के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें। घरों के आसपास जल न जमा होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें। रोग होने पर तरल पदार्थों का सेवन करें, शरीर में पानी की मात्रा कम न हाेने दें और चिकित्सक की सलाह लें।
सीएचसी पर सिर्फ बेड आरक्षित
डेंगू से निपटने के लिए सीएचसी पर जांच की सुविधा तक नहीं है। यहां पर डेंगू के मरीजों की रैपिड कार्ड से जांच की जाती है। जांच में डेंगू की पुष्टि होने पर ब्लड का सैंपल एलाइजा जांच के लिए भेजा जाता है। नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि सभी सीएचसी पर बेड आरक्षित हैं, रैपिड कार्ड से जांच भी की जाती है। जांच रिपोर्ट में पुष्टि होने पर एलाइजा जांच कराई जाती है।