बाराबंकी। सरावगी स्थित दिगंबर जैन मंदिर शुक्रवार सुबह भगवान नेमिनाथ का अभिषेक पूजन हुआ। मुनिश्री सौम्य सागर ने कहा कि जीवन में सेवा और समर्पण का भाव आवश्यक है। परमात्मा और गुरु के प्रति सेवा व समर्पण से पुण्य का संचार होता है और जीवन सुखमय, शांतिपूर्ण व आनंदित बनता है।
मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल भौतिक सुख-सुविधाओं को प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि आत्मकल्याण और सद्कर्मों के माध्यम से जीवन को सार्थक बनाने के लिए मिला है। जब व्यक्ति अपने जीवन में सेवा, विनम्रता और समर्पण को स्थान देता है, तब उसके भीतर अहंकार का क्षय होता है। मुनिश्री ने श्रद्धालुओं से संयमित जीवन जीने, नियमित आराधना करने और प्रेम, दया तथा करुणा की भावना को अपने आचरण में उतारने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जीवन में आने वाली परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को धर्म और सत्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।सभी को संयम, आराधना, प्रेम, दया और सत्कर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस को लेकर मुनि श्री ने कहा कि हम आजादी के 80वें साल में प्रवेश कर गए हैं। नेता की नैतिक जिम्मेदारी है कि नीति के साथ समदृष्टि के साथ कार्य करे।