जहां में तजकिरा शाम-ओ सहर हुसैन का है,
जमाना देख ले कितना असर हुसैन का है,
है कबीला जो बहत्तर गुलों का गुलदस्ता,
उसे सजाने में सारा हुनर हुसैन का है।
हजरत इमाम हुसैन ने मानवता का संदेश दिया और मानवता को बचाने के लिए करबला में अपनी व अपने घर वालों की अजीम कुर्बानी पेश की। नवी प्यारे नवासे ने शुरू में ही एलान कर दिया था कि मैं अपने नाना जान मुहम्मद अरबी के दीन को बचाने के लिए कुर्बानी दे रहा हूं। यजीद को सिर्फ नबी अकरम के नवासे से दुश्मनी नहीं थी बल्कि आप के लाए हुए इस्लाम से दुश्मनी थी। यह बातें मौलाना इस्लामउद्दीन ने कहीं। इस मौके पर मुसि्लमों के अलावा सिख आैर हिंदू धर्मावलंबी भी मौजूद थे।
दरगाह हजरत कुर्बान अली शाह दादामियां के हाजी सैय्यद उसमान गनी शाह के समाखाने में आयोजित महफिले मिलाद और जिक्र शोहदाए कर्बला से खिताब करते हुए मौलाना इस्लामउद्दीन ने आगे कहा कि हक और बातिल को समझने के लिए वाकिये कर्बला को समझना होगा। हजरत इमाम हुसैन से बैत लेकर यजीद अपनी गलत बातों को प्रमाणित करना चाहता था। हजरत इमाम हुसैन को यह कभी गवारा नहीं था और उन्होंने यजीद कीक बातें मानने से इंकार कर दिया। इस्लाम जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित करता है।
मौलाना ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन जिनके नाना पैगंबर हजरत मोहम्मद का यह किरदार था कि उनसे मिलकर दुश्मन भी दोस्त बन जाता है। उन नानाजान की परवरिश में पले बढ़े हजरत इमाम हुसैन कभी जंग नहीं कर सकते। उन्होंने दीन-ए-इस्लाम को बचाने के लिए इतनी अजीम कुर्बानी दी। मानवता की रक्षा के लिए किया गया कार्य अजीम कुर्बानी होता है।
मौलाना ने कहा कि जो अली और उनकी आल का दुश्मन वह इस्लाम का दुश्मन है। अल्लाह जालिम व कातिल का कभी माफ नहीं करेगा। कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला की जमीन पर सचाई और झूठ के बीच रेखा खींच कर यह एलान एक मोमिन की शान होना चाहिए। उन्होंने इबादत और सब्र पर जोर देते हुए कहा कि ताजदार करबला में जैसा सब्र और सजदा तलवार के साये में अदा किया वह कयामत तक कोई बशर ऐसी मिसाल नहीं पेश कर सकता है। इस मौके पर सादिक शाह, आलममीर शाह, अलफत शाह, अनवर शाह, कमाल शाह, खुदा बख्श शाह, अफजल शाह, मुन्नशाह, जलील वारसी, सुल्तान खां वारसी, निजामुद्दीन वारसी आदि मौजूद रहे।