बाराबंकी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शनिवार दोपहर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में अचानक छापा मारा। वहां गंभीर मरीज स्ट्रेचर पर पड़े मिले। सीनियर डॉक्टर नदारद रहे। प्रशिक्षु इलाज करते दिखे। चारों तरफ गंदगी पसरी दिखी। जो मरीज बेड पर भर्ती थे, उनको चादर तक नहीं दी गई थी। मात्र 10 मिनट के निरीक्षण में पूरी पोल खुल गई। डिप्टी सीएम निरीक्षण करते रहे परंतु जिम्मेदार सीएमएस व सीएमओ मौके तक नहीं पहुंचे।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक शनिवार को अयोध्या जाते समय बिना किसी पूर्व सूचना के जिला अस्पताल पहुंच गए। मुख्य गेट पर काफिला रुकते ही वे दबे पांव सीधे इमरजेंसी कक्ष में दाखिल हो गए। खिड़की से झांककर पहले अंदर मौजूद कर्मचारियों की स्थिति जानी फिर अचानक भीतर घुसकर रजिस्टर चेक करने लगे। वहां मौजूद एक युवक से जब डिप्टी सीएम ने पूछताछ की तो पता चला कि वह इंटर्नशिप कर रहा है। सीनियर डॉक्टर कहीं नजर नहीं आए।
निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ने देखा कि कई मरीज बेड के बजाय स्ट्रेचर पर लेटे हुए थे। जब उन्होंने इसकी वजह पूछी तो बताया गया कि बेड फुल हैं। इस पर वे वार्ड में पहुंचे तो वहां जिन बेड पर मरीज लेटे थे, उन पर चादर तक नहीं थी।
मलहम-पट्टी और इंजेक्शन कक्ष में गंदगी देखकर डिप्टी सीएम ने नाराजगी जताई। जब सफाई के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों ने सफाई दी कि कूड़ा मरीजों ने किया है तो डिप्टी सीएम ने तीखे स्वर में कहा- यह सब डॉक्टरों द्वारा इस्तेमाल किया गया मेडिकल वेस्ट है।
अस्पताल भवन में मौजूद था रजिस्टर
निरीक्षण के दौरान जब डिप्टी सीएम ने इमरजेंसी का मुख्य रजिस्टर मंगवाया तो पता चला कि वह मुख्य अस्पताल के भवन में रखा है। इस पर उन्होंने अफसरों को कड़ी फटकार लगाई और चेतावनी दी कि व्यवस्था में जल्द सुधार लाया जाए।
भाग खड़े हुए दलाल और बाहरी युवक
डिप्टी सीएम के पहुंचते ही अस्पताल परिसर में सक्रिय दलाल और बिना पहचान के काम कर रहे बाहरी युवक भाग निकले। एंबुलेंस संचालित करने वाले भी खिसक गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि डिप्टी सीएम जब भी आते हैं, सब कुछ अचानक ठीक-ठाक लगने लगता है लेकिन कुछ ही घंटों में फिर पुरानी लापरवाही लौट आती है।
समय पर इलाज न मिलने से दो बच्चों की हो चुकी है मौत
चार दिन पहले जैदपुर क्षेत्र में सड़क हादसे में घायल दो बच्चों को इसी इमरजेंसी में समय पर इलाज नहीं मिल सका। मजबूर में परिजन बच्चों को बाइक पर बैठाकर अस्पताल ले गए थे जहां दोनों की मौत हो गई। लोगों ने यह भी बताया कि यहां हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मरीजों को लखनऊ रेफर किया जाता है। यह समस्या डिप्टी सीएम के चौथे दौरे में भी उठी लेकिन इस बार भी केवल आश्वासन ही मिला।