बाराबंकी। सड़क सुरक्षा की तमाम कवायदों के बावजूद जमीनी धरातल पर सुधार होता नहीं दिख रहा है। लखनऊ-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर और शहर के व्यस्त चौराहों पर सुरक्षा के लिए लगाए गए डेलीनेटर और रिफ्लेक्टर बदहाल हालत में हैं। देखभाल न होने से कहीं यह टूटकर गिर चुके हैं तो कहीं इनकी चमक गायब हो चुकी है। रात के अंधेरे में वाहन चालकों के लिए यह डिवाइडर खतरा बन जाते हैं।
शहर के व्यस्त चौराहों में से एक पुलिस लाइन चौराहे पर डिवाइडर किनारे लगे डेलीनेटर टूटे हुए पड़े हैं। इनका टूटना न सिर्फ ट्रैफिक के लिए असुविधा का कारण बन रहा है बल्कि हादसों को भी न्योता दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार वाहन डिवाइडर से टकरा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ।
हाईवे पर भी स्थिति गंभीर
डिवाइडर पर लगे रिफ्लेक्टर और डेलीनेटर वाहन चालकों को संकेत देने का काम करते हैं। यह रात के समय वाहन चालकों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करते हैं। शहर से गुजरे लखनऊ-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी कई स्थानों पर डिवाइडर में बनाए गए कट पर लगाए गए रिफ्लेक्टर या तो काम नहीं कर रहे या टूट चुके हैं। रात के समय इन कटों पर रफ्तार से आते वाहन चालक अक्सर भ्रमित हो कर हादसे का शिकार हो जाते हैं।
छह माह में हुए 65 सड़क हादसे
इस वर्ष जनवरी से जून तक के दौरान एनएच-27 पर कुल 65 सड़क हादसे हो चुके हैं। इन हादसों में 45 लोगों की मौत हुई जबकि 43 लोग घायल हुए। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े भी काफी चिंताजनक हैं। ब्लैक स्पॉट की भी संख्या भी साल दर साल बढ़ती जा रही है। वर्ष 2021 में छह, वर्ष 2022 में सात, वर्ष 2023 में 11, वर्ष 2024 में 10 और 2025 में 29 में से 14 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए।