कुशीनगर का स्कूली वैन हादसा दिल दहला देने वाला तो है लेकिन क्या अपने जिले के जिम्मेदार इससे सबक लेंगे ये तो वक्त ही बताएगा फिलहाल यहां रोज ही नौनिहाल जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं।
नियमों की अनदेखी कर भूसे की तरह बच्चों को लादकर गाड़ियां फर्राटा भर रही हैं। अभिभावक भी कम लापरवाह नहीं है। उनका जिगर का टुकड़ा किस तरह जा रहा है, चालक कौन है और परमिट है या नहीं वो नहीं चेक करते। अमर उजाला ने शहर के कुछ चुनिंदा स्कूलों के बाहर जो तस्वीर देखी वह लापरवाही की हदें पार करती है। चालकों के पास लाइसेंस नहीं था, गाड़ियों की परमिट तो दूर उनके हालात भी बच्चों को ढोने लायक नहीं है। परिवहन विभाग जानकर भी अनजान बना हुआ है। किसी भी ऐसे वाहन पर लंबे समय से रिपोर्ट दर्ज कराना तो दूर एक चालान तक नहीं किया है।
जिला संभागीय कार्यालय में स्कूलों में बच्चों को ढ़ोने के लिए कुल 427 वाहनों का पंजीकरण है। इनमें से 124 छोटे वाहन और 303 निजी मिनी बसें शामिल हैं। वहीं शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में कई स्कूल ऐसे हैं जहां पर न तो स्कूल द्वारा और न ही विभाग द्वारा वाहनों की संबद्घता है। अनफिट व बिना लाइसेंस के बृहस्पतिवार को कई चालक वाहन चलाते मिले।