बाराबंकी। साहब खांसत-खांसत दम निकर जात है लेकिन या खांसी हय कि पीछा नाहीं छोड़ रही हव। कोई दवाई बाहर से लिख देतिव जिससे ई खांसी से पीछा छुट जातैय। यह कहना रहा सरैया के चंद्रभान का। पीएचसी दहिला पर दवा लेने आए रामदेव की बीमारी सुन मौके पर मौजूद चिकित्सकों ने तुरंत ब्लड की जांच कराई और तीन दिन की दवा देते हुए कहा कि इसे खाइए और यदि आराम न हो तो अस्पताल में आकर मिलिये।
रविवार को जिले के 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में करीब 2652 मरीज देखे गए। इनमें पुरुष मरीजों की संख्या 1053 और महिला मरीजों की संख्या 1177 और बच्चों की संख्या 422 रही। इस दौरान दहिला पीएचसी पर दवा लेने आए सरैयां गाव के चंद्रभान ने मौके पर मौजूद चिकित्सक प्रणव श्रीवास्तव को बताया कि पिछले एक सप्ताह से वह खांसी से काफी परेशान हैं।
कहा कि साहिब राति मा इतनी ज्यादा खांसी आवत है कि लागत है अबहीन दम निकर जाई। कई दवाई खाय चुके हैं, मुला आराम नाहीं मिला। कोई दवाई बाहर से लिख देतिव साहब, ई खांसी से पीछा छुट जातैय। इस पर चिकित्सक ने तुरंत ब्लड और बलगम आदि की जांच कराई और तीन दिन की दवाएं देते हुए कहा कि आराम मिल जाए तो अस्पताल में आकर और दवा ले लेना।
इसी प्रकार जगतखेड़ा के निवासी रामदेव ने बताया कि वह एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित हैं। निजी चिकित्सक से दवा लेने के बाद भी बुखार नहीं उतर रहा है। यह चंद नाम बानगी भर हैं। पीएचसी पर आयोजित स्वास्थ्य मेले में सबसे ज्यादा सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित मरीज आए जिन्हें चिकित्सकों ने देखा और दवाएं दी।
पीएचसी पर आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य स्वास्थ्य मेले में रविवार को 159 चिकित्सकों तथा 475 कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई। इस दौरान 141 लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए गए जबकि हालत गंभीर होने पर 32 मरीजों को रेफर किया गया। वहीं 371 लोगों की कोरोना की जांच की गई। इस दौरान पेट दर्द के 44, कब्ज के 279, शुगर के 93, त्वचा रोग के 393, टीबी के 12, खून की कमी के 78, हाइपरटेंशन के 50 मरीज आए जिन्हें उपचार के बाद दवाएं दी गईं।
सीएमओ डॉ. बीकेएस चौहान ने बताया कि जिले के 57 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर रविवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले में 2652 मरीज देखे गए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं की रही। इस दौरान 32 मरीजों की हालत गंभीर होने पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल भेजा गया। वहीं 422 बच्चों को भी चिकित्सकों द्वारा देखकर दवाएं दी गई।