बाइक से पिता के साथ दवाई लेने जा रहे भाई-बहन की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई। शहर कोतवाली क्षेत्र में बस अड्डे के समीप बुधवार की सुबह एक ट्रक ने बाइक में टक्कर मार दी। जिसमें गंभीर रूप से घायल भाई, बहन को जिला अस्पताल से ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
हादसे में पिता को भी मामूली चोट पहुंची है। पुलिस ने हादसा करने वाले ट्रक को कब्जे में लेकर उसके चालक को गिरफ्तार किया है।
सफदरगंज थाना क्षेत्र के गोढ़वा ग्वारी गांव निवासी अवधेश वर्मा (35) बुधवार की सुबह बाइक से बेटे पीयूष वर्मा (13) व बेटी प्रियांशी (7) को लेकर लखनऊ में एक चिकित्सक के यहां जा रहे थे। तभी शहर कोतवाली क्षेत्र में सिविल लाइन इलाके में बस अड्डे के समीप आ रहे ट्रक ने बाइक में टक्कर मार दी।
इस हादसे में जहां अवधेश वर्मा को मामूली चोट पहुंची वहीं बेटा पीयूष व बेटी प्रियांशी गंभीर रूप से घायल हो गई। आस पास के लोगों ने तीनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। जहां पर दोनों बच्चों की हालत नाजुक होने के चलते डॉक्टरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया।
जहां दोनों बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने हादसा करने वाले ट्रक व चालक सीताराम पुत्र सहजराम निवासी ककरहिया थाना जहांगीराबाद को गिरफ्तार किया है। कोतवाली के एसएसआई श्याम नरायन पांडेय ने बताया कि चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।
पीयूष 7 तो प्रियंाशी थी कक्षा 3 की छात्रा
खेती किसानी करने वाले अवधेश वर्मा अपने दोनों बच्चों को काफी अच्छी शिक्षा दिलवा रहे थे। यह दोनों बच्चे शहर के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ रहे थे। इनमें पीयूष कक्षा सात में था तो प्रियांशी कक्षा तीन की छात्रा थी।
दो बच्चों की मौत से बदहवास हुई मां
अवधेश वर्मा के दो बच्चे पीयूष व प्रियांशी ही थे। इनकी मौत की खबर सुनते ही मां सुनीता बदहवास हो गई। मां को यकीन नहीं हो रहा था कि जिन बच्चों को उन्होंने अपने हाथ से खाना खिलाने के बाद तैयार कर पिता के साथ भेजा था वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। इस हादसे के बाद पूरे गांव में गम का माहौल व्याप्त हो गया है।
प्रेम की रस्सी मौत की ओर खींच ले गई छोटी बहन को
हादसे का शिकार हुए पीयूष व बहन प्रियांशी में बहुत प्यार था। ये दोनों रोज साथ में ही स्कूल जाते थे। भाई पीयूष को पैर की हड्डी में परेशानी होने के चलते बुधवार की सुबह पिता अवधेश उसका इलाज कराने के लिए लखनऊ के एक चिकित्सक के पास ले जा रहे थे, तभी बहन प्रियांशी भी साथ जाने की जिद करने लगी। शायद भगवान को भी यही मंजूर था कि इन दोनों को एक साथ ही इस दुनिया से जाना है।