ये दोस्ती की ताकत ही थी कि शिवानी और सुनयना ने अपहरणकर्ताओं के मंसूबे पर पानी फेर दिया। अगर वे साथ नहीं होती तो अपहरण तय था। दोनों ने मुश्किल समय में हिम्मत नहीं हारी और ये तय किया कि बदमाशों के चंगुल से निकल भागना है और जब ठान लिया तो कर भी दिखाया।
अपहरणकर्ताओं के सामने बहादुरी दिखाकर दोनों छात्राओं ने जिले के लिए मिसाल पेश की है। छात्राओं ने यह साबित कर दिया कि गांव की बेटियां भी किसी से कम नहीं। ग्रामीणों में चर्चा है कि यदि यह छात्राएं इतनी निडरता से आरोपियों का सामना न करती तो वारदात को अंजाम दिया जाना पक्का था। इन छात्राओं के घर पर भी उनको शाबाशी देने भीड़ लग रही है। एएसपी दिंगबर कुशवाहा ने भी छात्राओं से मिलकर उनको शाबासी दी है। एएसपी ने कहा कि बेटियों का नाम वीरता पुरस्कार के लिए भेजा जाएगा। वहीं दूसरी ओर छात्राओं के अपहरण का प्रयास मामले में शिकायत के बाद भी पुलिस द्वारा कार्रवाई करने में हीलाहवाली से लोगों में रोष है।
इसके साथ पुलिस सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे है। एक ओर जहां छात्राओं ने बहादुरी दिखाई वहीं पुलिस ने कार्रवाई करने में ढिलाई बरती है। हालांकि एएसपी ने मुकदमा दर्ज कर दोषियों का पता लगाकर उन पर शिंकजा कसने की बात कही है।