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एसपी की लापरवाही उजागर

Mon, 06 Jul 2015 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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बाराबंकी। जिले में महिलाएं पुलिस की हैवानियत का शिकार हो रही हैं। सीएम 1090 के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दे रहे हैं। वहीं, पुलिस इतनी बर्बर हो गई कि महिला को थाने में जिंदा जला दिया। शाहजहांपुर में एक पत्रकार को पुलिस ने उसके घर में जिंदा फूंक दिया तो बाराबंकी के कोठी थाने मेें एसओ व उसके दीवान ने पत्रकार की मां को जिंदा जला दिया। अहम बात यह कि इस भयावह कांड के पहले की घटनाओं की सारी जानकारी कप्तान और दूसरे पुलिस अधिकारियों को थी। उसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया। जिसके बाद ये वारदात हुई। कप्तान की मौजूदगी में पुलिस ने अपनी गर्दन बचाने के लिए जिस तरह से महिला के छोटे बेटे से मनमानी तरीके से तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज करने की तेजी दिखाई उससे यह झलकता पुलिस इस मामले को बहुत हल्के में निपटाना चाह रही है। हालांकि, महिला के पति का कहना है कि वो मंगलवार को दूसरी तहरीर देगा। संवेदनहीन एसपी, देते रहे झूठे आश्वासन सरकार ने जिले की सुरक्षा जिन हाथों में सौंपी है वह ही संवेदनहीन हो गए हैं। कोठी थाने में जिंदा जलाई गई महिला के पति को जब पुलिस रविवार को पकड़कर लाई थी उसके कई घंटे बाद इस मामले में कई पत्रकारों ने एसपी से फोन कर कहा कि बेकसूर को थाने से छुड़वा दें पूछताछ करने के लिए जब बुलाया जाएगा वह थाने पहुंच जाएगा। एसपी अब्दुल हमीद ने यह तो कहा कि अभी छुड़वा रहे हैं पर किया कुछ नहीं। इसी का नतीजा है कि महिला को थाने में पुलिस की हैवानियत का शिकार होना पड़ा। अस्पताल न जाकर सीधे थाने पहुंच गए एसपी इस मामले में अपने विभाग के जिम्मेदार लोगों को बचाने के लिए पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद सीधे कोठी थाने पहुंच गए। एसपी ने जिला अस्पताल में जाकर न तो पीड़िता से बयान लेना मुनासिब समझा और न ही उसके बेहतर इलाज के लिए कुछ किया। सुबह से लेकर दोपहर दो बजे तक एसपी व एएसपी थाने में ही बैठकर मामले को रफादफा करने के लिए कागजों में उलटफेर करवाते रहे। पुलिस ने जबरन ले ली तहरीर इस मामले में पुलिस ने एसओ व एसआई के खिलाफ जो रिपोर्ट दर्ज की है उसमें जबरन तहरीर ली गई है। पीड़िता के पत्रकार पुत्र ने बताया कि उसकी मां के साथ थाने में इस वारदात के बाद सभी लोग जिला अस्पताल आए हुए थे। उसका कहना है कि घर में उसका छोटा भाई मौजूद था। जिसे एसपी ने पुलिस के द्वारा जबरन थाने बुलवा लिया और फिर उससे अपने सामने मनमानी तरीके से तहरीर लिखवा लिया। कहा कि वह अपने पिता के साथ मंगलवार को एक तहरीर देकर आरोपियों पर कार्रवाई की मांग करेंगे। अफसरों को करते रहे गुमराह इस वारदात के बाद जब शासन के उच्चाधिकारियों व पुलिस विभाग के आला अफसर इस मामले में यहां के एसपी व एएसपी समेत अन्य अधिकारियों से घटना की जानकारी ले रहे थे उस समय यहां के अफसर इस पूरे मामले को झूठा करार देने में लगे थे। मैनेज करते रहे एएसपी पत्रकार की मां के साथ हुई इस वारदात की जानकारी होने पर जिला अस्पताल में पत्रकारों व विभिन्न राजनीतिक दलों के लोगों का मजमा लगा रहा। लोगों को आक्रोशित होता देख उन्हें समझाने के लिए पहुंचे एएसपी उत्तरी कुंवर ज्ञानंजय हर किसी को मैनेज करने में जुटे रहे। पत्रकार के पीछे पड़ी थी कोठी पुलिस कोठी पुलिस पत्रकार के पीछे हाथ धोकर पड़ी थी। अभी कुछ माह पूर्व पुलिस ने उसके एक भाई को चोरी के आरोप में फंसाकर जेल भेजा था व पुलिस उसके खिलाफ एक न एक नए मामला ही खोजा करती थी। स्थानीय लोगों की मानें तो कोठी पुलिस के खिलाफ पत्रकार ने कई खबरें प्रकाशित की थी जिसके चलते पुलिस कर्मी उसको अपना विरोधी मानने लगे थे। पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए मौके की तलाश कर रही थी। आईजी, डीआईजी ने फोन पर ली जानकारी पत्रकार की मां के साथ कोठी थाने में हुई इस वारदात के बाद डीआईजी फैजाबाद रेंज वीके गर्ग व आईजी लखनऊ जोन जकी अहमद ने मामले मेें पल-पल की जानकारी ली। दोनों अफसरों ने यहां के पत्रकारों से फोन पर वार्ता करने के साथ ही पीड़ित परिवार के सदस्यों से वार्ता की और मामले में दोषी पुलिस कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही। डीएम ने खुद लिए बयान एक महिला को थाने में जिंदा जलाने के मामले मेें बाद डीएम योगेश्वर राम मिश्र जिला अस्पताल पहुंचे और वहां पूरे मामले की जानकारी ली। किसी मजिस्ट्रेट के न पहुंचने पर डीएम ने खुद पीड़िता के बयान दर्ज करना शुरू किया। डीएम ने बताया कि मामला बहुत ही गंभीर हैं कहा एसपी से बात कर इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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