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सात बेटियां लापता, पुलिस संवेदनहीन

Tue, 16 Feb 2016 11:36 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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सूबे में बेटियां सुरक्षित नहीं रह गई हैं। बेटियों के साथ आए दिन जघन्य वारदात हो रही हैं, मगर पुलिस चेत नहीं रही। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 12 वीं की छात्रा का अपहरण कर रेप व हत्या कर शव हाई सिक्योरिटी जोन में फेंक दिया जाता है और पुलिस पांच दिनों तक भनक नहीं लगा पाती।
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यही नहीं, पुलिस गुमशुदगी दर्ज कराने गए पीड़ित परिवार को यह कहकर भगा देती है कि लड़की कहीं भाग गई होगी। जिले में भी सात लड़कियों का पता पुलिस आज तक नहीं लगा सकी। इनके परिवार चाले आज भी अपनी बेटियों के वापस आने के इंतजार कर रहे हैं। पिछले पांच सालों में 45 मामले किशोरियों के लापता होने के आए थे।

इन लड़कियों का आज तक नहीं लगा सुराग
देवा के पटना गांव की प्रियांशी, हैदरगढ़ के घरकुइयां की स्वाती, चक चौबीसी की सरिता, कोतवाली के उत्तरी टोला की लक्ष्मी पाठक, टिकैतनगर आई फैजाबाद के सुभाष नगर की मीनाक्षी, टिकैतनगर के डडियामऊ के विवेकानंद सिंह की बेटी लवली, मंझपुरवा की महिमा आज भी लापता हैं जिनकी घर वापसी कराने में पुलिस नाकाम साबित हुई है।
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अपहरण व लापता बच्चों व युवक-युवतियों को खोजने के लिए पुलिस द्वारा टीम का गठन किया जाता है। डीसीआरबी के माध्यम से लापता के बारे में पूरे प्रदेश व अन्य प्रदेशों के थानों में भी उसका फोटो समेत अन्य विवरण भेजा जाता है। इसके साथ ही अपह्त के पोस्टर बनवाकर सार्वजनिक स्थलों पर लगाने के साथ ही विभिन्न समाचार पत्रों व टेलीविजन मेें भी अपह्त के बारे में भी जानकारी प्रकाशित करवाई जाती है। अपहरण व गुमशुदा के किसी भी मामले में गायब व्यक्ति हो या नाबालिग उसे तलाशने का पुलिस द्वारा बराबर प्रयास किया जाता है।
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- अब्दुल हमीद, एसपी
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