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खालिद किरमानी नहीं रहे

Fri, 19 Jun 2015 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
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बाराबंकी। प्रतापगढ़ के गोयल होटल में आग लगने से हुए हादसे में मरने वालों में बाराबंकी शहर के मोहल्ला रसूलपुर निवासी खालिद किरमानी भी थे। होटल में आग लगने के बाद दम घुटने से इनकी मौत शुक्रवार की भोर लगभग चार बजे ही हो गई थी, लेकिन यहां खालिद के घर में मौजूद उनकी बूढ़ी मां और दो मासूम बेटियों और गर्भवती बीबी को इस मनहूस खबर को कैसे दी जाए और कौन दे यह किसी की समझ में नहीं आ रहा था। परिवार वालों को बताया गया कि हादसे में वह गंभीर रुप से घायल हैं जिन्हें प्रतापगढ़ से बाराबंकी लाया जा रहा है। यह सब बातें तो खालिद के परिवार को बहलाने वाली थी। सच्चाई ये है कि अनहोनी का एहसास उनके परिवार को हो गया था और मासूम बेटियों को छोड़ सब मानो बेसुध हो गए। रात करीब साढे़ आठ बजे खालिद का शव आया तो परिवार में कोहराम और पूरे मोहल्ले में मानों मातम सा छा गया। खालिद किरमानी (40) बजाज एलियांस में मार्केटिंग व फाइनेंस का कार्य देखते थे और इनकी तैनाती लखनऊ में थी। बृहस्पतिवार को दो दिन के आफिसियल टूर पर प्रतापगढ़ जाने की बात कहकर वह गए थे। किसे पता था कि अगले दिन भोर में ही यह मनहूस खबर आ जाएगी। खालिद किरमानी के दो बेटियां सात साल की फातिमा व ढाई साल की दानिया है और खालिद की पत्नी गर्भवती हैं। घर पर इसके अलावा खालिद की बूढ़ी मां हैं और इनका छोटा भाई दिल्ली में नौकरी करता है। खालिद बहुत ही खुशमिजाज और हरदिल अजीज लोगों में शुमार थे। शुक्रवार को देरशाम करीब साढे़ आठ बजे शव के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। वहीं पूरे मोहल्ले में मातम मच गया। इनकी मौत की सूचना पूरे शहर में आग की तरह फैल गई। जिसे भी इस मनहूस खबर की सूचना मिली वह इनके घर की ओर दौड़ पड़ा। देखते ही देखते सैकड़ाें की संख्या में चाहने वाले एकत्र हो गए। और रोते बिलखते परिवारीजनाें को ढांढस बंधाने लगे। मां और बूढ़ी दादी को रोता बिलखता देख मासूम की आंखों से भी आंसू निकल रहे थे। वहीं खालिद की पत्नी शव देख-देखकर बार बार बेहोश हो जा रही थी। उनके मुंह से यहीं निकल रहा था कि अब क्या होगा इन मासूम की देखभाल कौन करेगा।
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