जिला कारागार में बंद रसूखदार कैदियों व बंदियों के आगे जेल प्रशासन बौना है। बनारस जेल में हुए उपद्रव जैसे हालात यदि यहां भी हो जाएं तो इससे जेल प्रशासन को निपटना आसान नहीं होगा। जिला जेल के भवन का निर्माण सन 1861 में हुआ था।
जेल में क्षमता से अधिक बंदी व कैदी हैं। अधिकारियों के निरीक्षण में जेल के अंदर कई बार कई आपत्तिजनक वस्तुएं भी मिल चुकी हैं। जबकि इस समय जेल में स्टाफ का भी टोटा है। कारागार में सिपाहियों के पास अत्याधुनिक हथियार भी नहीं हैं। जो असलहे हैं, वे काफी पुराने हैं।
वर्ष 2001 मेें जिला जेल के एक डिप्टी जेलर पर बदमाशों ने गोलियां बरसाई थीं पर इस घटना में उनकी जान बच गई थी। वहीं तीन साल पहले जेल अधीक्षक को भी बम से उड़ाने की साजिश का पर्दाफाश हो चुका है।
जिला जेल के भवन का निर्माण 1861 में हुआ था। जेल की क्षमता 20 बैरकों में 900 बंदियोें की है जबकि यहां पर इस समय करीब 1050 बंदी/कैदी हैं। कारागार का भवन तो बहुत पुराना है पर यहां नई बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया गया है।
जेल परिसर में सीसीटीवी कैमरे तो लगे हैं लेकिन मोबाइल जैमर नहीं लगा है। स्टाफ की कमी के चलते यहां हमेशा खतरा भी बना रहता है।