बाराबंकी। अपनों के रचे जाल में कैरियर डेंटल कालेज का मालिक व पूर्व राज्यमंत्री इकबाल अहमद फंस गया। सूत्रों की मानें तो इकबाल सरकार व पुलिस के लिए किरकिरी बन गया था। सरकार व पुलिस आरोपों में घिर गई थी। इसी के चलते पुलिस ने इकबाल को दबोचने के लिए उसके और अपने एक विश्वास पात्र का सहारा लिया। साख बचाने के लिए पुलिस यह चाल रंग लाई और बुधवार दोपहर ‘अपनों’ की मुखबिरी पर उसे दबोच लिया। इकबाल की गिरफ्तारी में लगी आठ पुलिस टीमों में सीओ सदर के नेतृत्व में बनी पुलिस टीम को इस मामले में सफलता मिली है।
बीते आठ जून को बीएमडब्ल्यू कंपनी की रेंज रोवर सवार पूर्व मंत्री इकबाल व उसके पांच साथियों ने अहमदपुर टोल प्लाजा पर अस्सी रुपये टोल टैक्स न देने को लेकर बवाल किया था। विरोध पर फायरिंग करते हुए टोल प्लाजा के मैनेजर पर जानलेवा हमला कर भाग निकले थे। मैनेजर की तहरीर पर पुलिस ने पूर्व मंत्री समेत पांच पर मुकदमा पंजीकृत कर तफ्तीश शुरू। पुलिस ने दो दिन में कार चालक रिजवान व गनर जोगेंद्र को दबोच लिया। जबकि, रसूख के दम पर पूर्व राज्यमंत्री बचता रहा। मीडिया के दबाव में सरकार के हस्तक्षेप बढ़ने पर पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही थी। सोशल मीडिया पर आरोपों की झड़ी लग गई। अपनी साख बचाने के लिए बाराबंकी पुलिस ने इकबाल को दबोचने के लिए अपनों का जाल बिछाया और वारंट लेकर उसकी तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी की और आज दोपहर हाईकोर्ट में वकील से मिलकर निकल रहे इकबाल को दबोच लिया।
मात्र 80 रुपये के लिए फंसा पूर्व मंत्री
करोड़ों की हैसियत रखने वाले पूर्व मंत्री इकबाल सिर्फ 80 रुपये के टोल टैक्स न देने में फंस गया है। उसका पूरा कैरियर दांव पर लग गया। सूत्रों की मानें तो उसने सिर्फ रुतबा गांठने के लिए ऐसा किया था। उसे अगर जरा सी भी अपने फजीहत का भान होता तो ऐसी हरकत कभी न करता।
शुरूआत में मामले को दबाने का हुआ प्रयास
जिस दिन पूर्व मंत्री ने टोल प्लाजा पर हंगामा काटा था पुलिस को उसी दिन उनके बारे में पता लग गया था। इसके बाद दो दिन तक मामले को दबाने का प्रयास किया गया और कहा गया कि मामले में आरोपियों का पता नहीं लग पा रहा है। पर जब मामला मीडिया की सुर्खियां बनने लगा फिर न जाने क्या खेल हुआ अचानक इकबाल का नाम सामने आ गया। इसी बीच पुलिस ने इकबाल के एक निजी गनर व ड्राइवर को पकड़कर जहां रेंज रोवर कार बरामद किया वहीं एक लाइसेंसी रिवाल्वर भी बरामद किया था।
पुलिस को चकमा देते रहे इकबाल
इस मामले में पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री इकबाल का नाम आने के बाद उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने प्रयास शुरू कर दिया। इस काम के लिए जिले के आठ थानेदारों समेत पुलिस की आठ टीम लगाई थी। पुलिस टीम जहां बार बार इकबाल को पकड़ने के लिए जाल बिछा रही थी वहीं पूर्व मंत्री पुलिस को लगातार चकमा दे रहे थे। यहीं नहीं पुलिस के कुछ जवान पूर्व मंत्री के कुछ करीबियों के भी आगे पीछे लगे थे जिसके बाद मंत्री पुलिस पकड़ में आ सके है।
गहनता से पूछताछ हुई तो सामने आ सकते है कई बड़ों के नाम
इकबाल ने अपनी रेंज रोवर कार के रजिस्ट्रेशन मामले में जिस तरह से जालसाजी की है उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कैसे काम करता रहा होगा। अब यदि जिले की पुलिस ने इकबाल को कोर्ट से रिमांड पर लेकर गहनता से पूछताछ करेगी तो उससे प्रदेश के कई बड़े नेता व अफसरों के नाम भी सामने आ सकते है। लेकिन अब यह तो समय ही बताएगा कि पुलिस इकबाल से कोई राज उगलवा पाती है या नहीं।
इन्हें मिली शाबासी
दर्जा प्राप्त पूर्व राज्यमंत्री इकबाल को गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम का नेतृत्व सीओ सदर विशाल विक्रम सिंह कर रहे थे। इस टीम में एसओ सफदरगंज जैनुद्दीन अंसारी, एसओ जैदपुर अशोक कुमार, क्राइम ब्रांच प्रभारी श्रीधर पाठक समेत आदि पुलिस कर्मी शामिल रहे है। इकबाल को पकड़ने में इसी पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दिल्ली से दबोचने की अफवाह फैलाते
इकबाल की गिरफ्तारी की मीडिया को भनक लगते ही बाराबंकी पुलिस उन्हें दिल्ली से दबोचने की अफवाह फैलाती रही। दरअसल, पुलिस राजनैतिक प्रेशर से बचने के लिए ऐसा स्वांग रच रही थी। टीम आरोपी को गुपचुप तरीके से रखे हुए है। फजीहत से बचने के लिए बाराबंकी मीडिया के सामने भी आरोपी को नहीं प्रस्तुत किया गया। हालांकि, एसपी का कहना है कि इकबाल की दिल्ली में गिरफ्तार होने की अफवाह उसके परिवारीजनों द्वारा फैलाई जा रही है।
असलहे बरामद करने को लेगी रिमांड
एसपी अब्दुल हमीद का कहना है कि इकबाल को गिरफ्तार करने के साथ उससे फरार दोनों आरोपियों और वारदात में इस्तेमाल असलहों के बारे में पूछताछ की गई। टालमटोल के चलते उसका पुलिस कस्टडी रिमांड लेने की तैयारी की गई है। उसे गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर कोर्ट में पेश करना है। असलहों की बरामदगी के लिए उसे रिमांड पर लेकर विभिन्न स्थानों पर छापामारी की जाएगी।
राजनेताओं व अफसरों से थी अंतरंगता
कॅरियर डेंटल कॉलेज के मालिक इकबाल अहमद के राजनेताओं व पुलिस अफसरों से अंतरंग संबंध थे। खुद को सपा के एक कद्दावर नेता का बेहद करीबी बताने वाले इकबाल अहमद ने राज्यमंत्री का दर्जा हासिल कर लिया था, बाद में उसे बर्खास्त किया गया। एक मई को लखनऊ से हटाए गए एसएसपी यशस्वी यादव से भी उसकी दोस्ती थी। वह देर रात एसएसपी के आवास में बेरोकटोक जाता था। हजरतगंज इलाके में स्पोर्ट असलहों के कारोबारी मो तारिक को असलहों का तस्कर बताकर गिरफ्तारी के पीछे भी उसका खेल चर्चा में आया था। इसके अलावा भी कई आईएएस व आईपीएस अफसरों से उसके गहरे संबंध थे।
पनाह देने वालों पर भी कार्रवाई
इकबाल की तलाश में कई दिन से राजधानी की खाक छान रही बाराबंकी पुलिस ने उसे पनाह देने वालों पर भी कार्रवाई का इरादा बनाया है। विवेचक संतोष उपाध्याय ने बताया कि इकबाल के कारनामे और उसकी सरगर्मी से तलाश की खबरें विभिन्न अखबारों में प्रमुखता से छपी और टीवी चैनलों पर भी खबर चली। इससे इकबाल के सभी करीबियों को उसकी करतूत की जानकारी हो गई थी। पुलिस को उसके बारे में सूचना देना उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन कानून की मदद नहीं की। अब इकबाल के मोबाइल के कॉल डिटेल व अन्य तरीकों से उसे पनाह देने वालों का पता लगाकर कार्रवाई की जाएगी।