प्रतिबंधित कंपनी का कीटनाशनक डालने के बाद 18 बीघा आलू सड़ने के मामले में कृषि रक्षा अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी को जांच सौंपी गई है। लेकिन ये जांच मात्र औपचारिकता ही लग रही है। क्योंकि अमर उजाला में शुक्रवार को खबर छपने के बाद से ही कंपनी के अधिकारियों ने किसान पर समझौते के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया।
मालूम हो कि विकास खंड देवा के ग्राम लोंहजर निवासी किसान अनंतराम पु़त्र शीतल प्रसाद ने अपने 12 बीघा खेत में 60 बोरी आलू का बीज बोया था। वहीं जवाहिरपुर निवासी किसान श्रवण कुमार ने भी रिंकू के कहने पर ही 6 बीघा में पड़ने वाली 30 बोरी आलू पर एक प्रतिबंधित कंपनी के आमिस्टार रसायन का छिड़काव किया था। दोनों किसानों ने एक सप्ताह पूर्व आलू की बोआई की थी।
बोआई के बाद खेत में नाली बनाने के दौरान खेत में आलू के सड़े बीज निकलने पर मामले का खुलासा हुआ था। किसानों ने क्षेत्रीय सेल्समैन रिंकू के बहकावे में आकर कंपनी के रसायन छिड़काव किया था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद बौखलाए अधिकारियों व कंपनी के कर्मचारियों द्वारा किसानों से सुलह का दबाव बनाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि कंपनी के क्षेत्रीय मैनेजर की ओर से आलू का बीज देने का प्रलोभन दिया जा रहा है।
मामले को दबाने में जुटा प्रशासन
किसानों को 18 बीघा बर्बाद हुआ आलू का बीज कृषि विभाग के अधिकारियों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। इसलिए अधिकारी कंपनी को बचाने में जुटे हैं। इस संबंध में कृषि उपनिदेशक डॉ. एसके सिंह ने तो कह दिया कि किसान ने पीपीओ को लिखित दे दिया है कि उसने कंपनी के किसी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं किया है और न ही उसका कोई आलू सड़ा है। पीपीओ डॉ. एलएस यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मेरे पास कोई किसान नहीं आया है। जबकि किसान श्रवण का कहना है कि उसने किसी प्रकार का कोई लिखित अधिकारियों को नहीं दिया।