प्राचीन श्रीराम जानकी मंदिर से रविवार रात बेखौफ चोरों ने करोड़ों रुपये कीमत की अष्टधातु की चार मूर्तियां उड़ा दी। चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मंदिर को बाहर ताला बंद कर भाग निकले। मंदिर के पुजारी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं मंदिर में हुई चोरी की वारदात के बाद ग्रामीणों में आक्रोश भी व्याप्त हो गया है।
थाना सफदरगंज क्षेत्र में लक्ष्बर बजहा मजरे राजापुर गांव में श्रीराम जानकी मंदिर बना है। यहां पर रविवार रात चोरो ने मंदिर मेें रखी राम, लक्ष्मण, सीता व हनुमान की चार मूर्तियां चोरी कर ली। सोमवार सुबह जब मंदिर के पुजारी भागीरथ पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचे तो मूर्तियां गायब देख उनके होश उड़ गए।
इसके बाद यहां हुई चोरी की बात गांव में फैलने के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने मंदिर में हुई चोरी की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की पर किसी भी आरोपी का पता नहीं लग सका है। मंदिर के पुजारी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
किसी जानने वाले ने की वारदात
श्रीराम जानकी मंदिर में चोरी की वारदात के बाद चोर मंदिर में बाहर ताला बंदकर भाग निकले। दरअसल पुजारी जब कहीं बाहर जाते थे तो मंदिर में ताला लगाकर उसकी चाबी एक वहीं एक स्थान पर रख देते थे। जिसके जानकारी गांव के कुछ लोगों को थी।
रविवार रात में भी मंदिर के पुजारी कहीं बाहर गए हुए थे जिसके चलते मंदिर में कोई भी मौजूद नहीं था। चोरों ने चाबी उसी स्थान से उठाई और चोरी के बाद मंदिर में ताला बंद कर उसी जगह चाबी रख दिया। जिस तरह से मंदिर में चोरी हुई है उससे लगता है कि गांव के ही लोग इस वारदात में शामिल है।
19 किलो वजन की थी अष्टधातु की चारों मूूर्तियां
ग्रामीणों की माने तो श्रीराम जानकी मंदिर से चोरी हुई अष्टधातु की चारों मूर्तियों में तीन मूर्तियां पांच-पांच किलो व एक मूर्ति चार किलो वजन की थी। यह चारों मूर्तियां करीब 19 किलो वजन की थी। इस मंदिर में गांव के लोग नियमित पूजा पाठ करते थे। मंदिर से मूर्तियां चोरी होने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश भी व्याप्त हो गया है।
1907 में हुआ था मंदिर का निर्माण
ग्रामीणों की माने तो राजापुर गांव में बने रामजानकी मंदिर का निर्माण गांव के ही रामआसरे वर्मा के द्वारा वर्ष 1907 में करवाया गया था। रामआसरे के कोई संतान नहीं थी जिसके चलते उन्होंने गांव में यह मंदिर बनवाकर अपनी 22 बीघा जमीन भी मंदिर के नाम कर दी थी। अब एक ट्रस्ट बना है जिसकी देखरेख में मंदिर की जमीन में कृषि कार्य व अन्य काम काज किए जाते हैं।
14 हजार में खरीदी गई थी चारों मूर्तियां
राजापुर गांव में लक्ष्बर बजहा मंदिर के पुजारी भागीरथ के अनुसार मंदिर का निर्माण कराने वाले रामआसरे वर्मा वर्ष 1907 मेें अयोध्या से यह चारों मूर्तियां 14 हजार रुपये में खरीदकर लाए थे। हालांकि अब इन चारों मूर्तियों की कीमत एक करोड़ से भी अधिक की बताई जा रही है।
राजापुर गांव के श्रीराम जानकी मंदिर में चोरी हुई चारों मूर्तियां अष्टधातु की नहीं बल्कि पीतल की है। मामले में पुलिस द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है। इस वारदात में गांव के ही लोगों की संलिप्तता होना लग रहा है। पुलिस द्वारा जल्द ही वारदात का खुलासा किया जाएगा।
- जैनुद्दीन अंसारी, एसओ, सफदरगंज