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509 गांवों में नहीं पहुंच सकी बिजली की रोशनी

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बाराबंकी। सरकार का दावा कुछ भी हो मगर हकीकत इससे जुदा है। जिले के 509 मजरों में बिजली की रोशनी आजादी के इतने सालों बाद भी नहीं पहुंची है। आज भी ढिबरी की रोशनी में भविष्य के उजाले की तलाश में ग्रामीण जुटे हैं।
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कार्यदायी संस्था एल एंड टी द्वारा गांव व मजरों विद्युतीकरण किया जा रहा है। कुल 4930 मजरों में अभी तक 4421 गांव व मजरों का विद्युतीकरण हो चुका है। अभी 509 गांव व मजरों का विद्युतीकरण होना शेष है। दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के तहत ऐसे मजरे जिनकी आबादी सौ से नीचे है उनका विद्युतीकरण किया जा रहा है। रामसनेहीघाट डिवीजन के पासिनपुरवा मजरे परीवा की आबादी करीब तीन सौ है। यहां पर विद्युतीकरण नहीं हो सका है। उमरखान का पुरवा मजरे सहाली की आबादी करीब ढाई सौ है, यहां विद्युतीकरण नहीं हुआ है। बनपुकार मजरे हसनपुर में भी विद्युतीकरण नहीं हुआ। फतेहपुर डिवीजन में मंगलीपुरवा, सल्लापुर, इदायतपुर, सरैया, ब्रम्हनपुरवा, नई दुनिया, रामविलास पुरवा में विद्युतपोल लगा कर तार खींचे गए हैं, लेकिन बिजली नहीं पहुंची है। बीबीपुर, फिरोजपुर, तकिया, अटैचापुरवा, भदेवा, बन्नी रोशनपुर में सिर्फ पोल लगाए गए हैं। सिद्घौर के महुवागढ़ मजरे बेरिया, पूरेरंजीत मजरे मोतिकपुर व सरवनपुर, टिकैतनगर के सूबेदार पुरवा, कोठरी, कलअंतपुरवा, भवानीगंज में बिजली की रोशनी नहीं पहुंच सकी है। विकास की दौड़ में पीछे रह गए ऐसे गावों के होनहार अभी भी ढिबरी की रोशनी में पढ़ बढ रहे हैं। इन गांवों के बुजुर्गों को भी इंतजार है कि उनके बच्चों को बिजली की रोशन मयस्सर हो जाए। यहां के लोग ढिबरी की रोशनी ने गुजर बसर कर रहे हैं। एल एंड टी के जिला प्रभारी डीके मिश्रा का कहना है कि विद्युतीकरण का चल रहा है। काफी कार्य भी हो चुका है। दो महीने मेें सभी गांव व मजरे में विद्युतीकरण हो जाएगा।
विद्युतीकरण के लिए 2923 गांव व मजरों का सर्वे हुआ था जिसके बाद विद्युतीकरण कार्य किया गया है। अभी कई गांव या मजरे ऐसे हैं जिनका विद्युतीकरण होना है। कार्य चल रहा है विद्युतीकरण कार्य जल्द हो जाएगा। - आरपी सिंह, अधीक्षण अभियंता पावर कार्पोरेशन
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