घाघरा में उफान से तराई के बिगड़े हालात
बाराबंकी। घाघरा नदी में नेपाल के बैराज से छोड़े गए पानी ने तराई में तांडव मचाना शुरू कर दिया है। इससे वहां के हालात बिगड़ गए हैं। तीन दर्जन से ज्यादा गांवों में पानी भरने से लोग सुरक्षित स्थानों को निकल पड़े हैं।
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर पहुंच गया है। वहीं, नेपाल ने फिर दो लाख 32 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया है।
हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने राहत शिविरों को सक्रिय कर दिया है तथा बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट करते हुए पीड़ितों की मदद के निर्देश दिए गए हैं।
घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान 106.076 से ऊपर 106.776 तक पहुंच गया है। ये खतरे के निशान 70 सेमी ऊपर है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे तराई के हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
करीब तीन दर्जन से ज्यादा गांवों में पानी भर गया है। एक दर्जन से ज्यादा अन्य गांवों में किसी भी समय बाढ़ का पानी पहुंच सकता है।
जिन गांवों में पानी पहुंच गया है, वहां के लोग सुरक्षित स्थानों के लिए परिवारीजनों और मवेशियों के साथ निकल पड़े हैं। मगर नावें नहीं मिलने से बाढ़ पीड़ितों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिन गांवों के लोगों को नावें नहीं मिल पाई हैं, उन्होंने अपने घरों की छतों को ही आशियाना बना लिया है और तिरपाल तानकर परिवारीजनों के साथ जीवन यापन कर रहे हैं।
वहीं, बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को पूरी तरह अलर्ट रहकर पीड़ितों की मदद करने के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा शिविरों को सक्रिय कर दिया गया है। लोगों से राहत शिविरों में पहुंचने की अपील की जा रही है।
वहीं, एसडीएम रामनगर अभय कुमार पांडेय और सिरौलीगौसपुर एसडीएम अजय कुमार द्विवेदी बराबर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को राहत सामग्री का वितरण कराने में जुटे हैं।
जिला प्रशासन ने किसी भी स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ग्रस्त इलाके में पीएसी बुला ली है। बाढ़ क्षेत्र के लिए कानपुर से एक प्लाटून फ्लड पीएसी यहां पहुंची है।
मंगलवार को पीएसी के जवानों ने बाढ़ग्रस्त इलाके में भ्रमण कर हालात का जायजा लिया। बुधवार को यदि बाढ़ के हालात और बिगड़े तो कई मोटरबोटों व अन्य संसाधनों से लैस पीएसी के जवान राहत व बचाव कार्य में जुट जाएंगे।
एडीएम संदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि, नेपाल के बैराज से दो लाख 32 हजार क्यूसेक पानी फिर छोड़ दिया है। इससे घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 70 सेमी ऊपर पहुंच गया।
स्थिति को देखते हुए बाढ़ राहत शिविरों को सक्रिय कर लोगों से इनमें पहुंचने की अपील की जा रही है। बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मियों को पीड़ितों की मदद करने के आदेश दिए गए हैं।