बाराबंकी। घाघरा नदी का पानी एक बार फिर बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के एक सैकड़ा गांवों के नजदीक पहुंच कर रुक गया है। क्योंकि घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से 65 सेंमी ऊपर पहुंच स्थिर हो गया है। पानी घटने और बढ़ने के बाद बाढ़ प्रभावित गांवों में संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। लेकिन इससे निपटने के इंतजाम नाकाफी दिखाई पड़ रहे हैं। जिन गांवों के किनारे पानी पहुंच गया है उनमें अतरसुइया, किठुली, गोबरहा, ढेमा, असवा, लिलार, टिकरी, सनावां, पारा, जलपुरवा, बेहटा समेत एक सैकड़ा गांव पानी से घिरे हुए हैं। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी का पानी पिछले पौने दो माह से जो तबाही मचाए उससे रातों की नींद और दिन का सकून हराम हो गया है। दो वक्त की रोटी और मवेशियों के लिए चारा जुटाने में ही पूरा वक्त गुजर जाता है।
घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान से 65 सेमी ऊपर पहुंच कर स्थिर हो गया है। नदी का पानी घटेगा या बढ़ेगा यह कहना मुश्किल होगा। बाढ़ पीड़ितों के सामने संकट है इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। बाढ़ पीड़ितों में बराबर राहत सामग्री का वितरण कराया जा रहा है इसके साथ ही यथा संभव मदद भी की जा रही है। - अनिल कुमार सिंह, एडीएम