दफ्तर में अभिलेख और फील्ड
में जाकर टीम ने देखी हकीकत
क्रासर
- बीज ग्राम योजना में 16 लाख के घोटाले का मामला
- कृषि निदेशक व दो ज्वाइंट डायेक्टरों को सौंपी है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। बीज ग्राम योजना में 16 लाख रुपये के घोटाले की शासन स्तर से कराई जा रही जांच करने पहुंची टीम ने उपकृषि निदेशक कार्यालय में संबंधित पटल के अभिलेखों की पड़ताल की व फील्ड में जाकर हकीकत जानी। इसकी रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंप दी जाएगी। शासन के आदेश पर इस जांच की जिम्मेदारी प्रदेश स्तर के दो ज्वाइंट डॉयरेक्टर को सौंपी गई है।
जिलें में चार वित्तीय वर्ष में बीज ग्राम योजना के तहत किसानों के प्रशिक्षण कराने के लिए 16.87 लाख रुपये की मिली धनराशि का घोटाला इस पटल पर तैनात वरिष्ठ सहायक रामकृष्ण पाल ने केंद्र प्रभारियों के साथ मिलकर किया। अधिकारियों की सरपरस्ती में कागजों पर प्रशिक्षण होना दर्शाकर फर्जी बिल व वाउचर लगाकर लाखों रुपये की धनराशि हजम कर ली गई। राजकीय बीज भंडार के केंद्र प्रभारी पैसा न मिलने पर कार्यालय पहुंचे तो पता चला कि संबंधित लिपिक ने उनके द्वारा लगाए गए पेडबाईमी के वाउचर का भुगतान अपने नाम करा लिया है। उसके बाद की गई पड़ताल में कार्यालय में तीन वित्तीय वर्ष के थोड़े बहुत बिल वाउचर मिले तो वितीय वर्ष 2017-18 में किए गए भुगतान का एक भी वाउचर विभाग के पास नही पाया गया था। इसकी शिकायत पर शासन स्तर से इस मामले की जांच कृषि निदेशक को दी गई थी। जिस पर कृषि निदेशक ने संयुक्त कृषि निदेशक धान व फसले एके सिंह व संयुक्त कृषि निदेशक अभियंत्रण अनिल दीक्षित की संयुक्त टीम बनाकर जांच की जिम्मेदारी दी थी।
वर्जन
मामले की जांच कार्यालय से लेकर फील्ड तक करने के बाद रिपोर्ट तैयार कर ली गई। यह रिपोर्ट गोपनीय है। इसलिए इस बारे में कुछ बताना उचित नहंीं है। जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
एके सिंह
संयुक्त कृषि निदेशक धान एवं फसले