दहेज हत्या के मामले मेें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी पति को 12 वर्ष की कैद व दस हजार रुपये अर्थदंड भुगतने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने मामले के आरोप सास को संदेह के लाभ में दोषमुक्त करार दिया है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता अमर सिंह यादव ने बताया कि कोड़वासी मजरे रामपुर रायसाहब कोतवाली रामसनेहीघाट निवासी विजय बहादुर ने अपनी पुत्री ममता की शादी 20 मई 2014 को ग्राम मूसेपुर निवासी ज्ञानेंद्र से की थी।
लेकिन पति ज्ञानेंद्र कुमार व सास प्रेमादेवी दिए गए दहेज से खुश नहीं थे और ममता से बाइक व सोने की जंजीर की मांग करते थे। इस बात की शिकायत ममता ने अपने माता पिता से की लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण मांग पूरी नहीं कर सके।
5 नवंबर 2014 को विजय बहादुर को सूचना मिली कि उनकी पुत्री ममता ने फांसी लगा ली है। सूचना पर विजय बहादुर व उनके परिवारीजन मौके पर पहुंच तो उन्होंने देखा कि ममता के कमर पर दाहिने कान के नीचे व होठ पर चोट के निशान थे। ससुराल वालों ने ममता की मारपीट कर हत्या कर दी।
घटना की रिपोर्ट ममता के पिता ने कोतवाली रामसनेहीघाट में दर्ज कराई थी। न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पत्र की ओर से 7 गवाह पेश किए गए। गवाहाें बयान व दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायमूर्ति आरबीएस मौर्या ने आरोपी पति ज्ञानेंद्र को दोषी पाते हुए 12 वर्ष की कैद व दस हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई। कोर्ट ने सास प्रेमा देवी को संदेह के लाभ में दोषमुक्त करार दिया।