बाराबंकी। मसौली में बहुचर्चित महिला सिपाही विमलेश पाल की हत्या के मामले में हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आरोपी कांस्टेबल इंद्रेश मौर्य को जमानत दे दी है। अदालत ने सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस अभिलेखों में दर्ज तथ्यों के बीच प्रथम दृष्टया विरोधाभास पाए जाने पर मामले को गंभीरता से लिया।
मामला जुलाई 2025 का है। सुल्तानपुर जिले की मूल निवासी विमलेश पाल सुबेहा थाने में तैनात थीं। उनकी ड्यूृटी रामनगर के महादेवा मेले में लगाई गई थी। 30 जुलाई 2025 को मसौली थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे झाड़ियों में विमलेश का शव बरामद होने के बाद उसके भाई की तहरीर पर कांस्टेबल इंद्रेश मौर्य के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया था।
तब से आरोपी न्यायिक हिरासत में था। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार महिला सिपाही की मृत्यु पोस्टमार्टम से तीन से चार दिन पूर्व हुई थी। चूंकि पोस्टमार्टम 30 जुलाई को किया गया था, इसलिए मृत्यु की संभावित तिथि 26 या 27 जुलाई के आसपास है।
इसके विपरीत, अदालत के निर्देश पर प्रस्तुत पुलिस की जनरल डायरी (जीडी) में महिला सिपाही की 27, 28 और 29 जुलाई को ड्यूटी पर उपस्थिति दर्ज पाई गई। रिकॉर्ड में संबंधित प्रविष्टियों के साथ हस्ताक्षर भी मौजूद बताए गए हैं। आरोपी के अधिवक्ता फारूक अय्यूब ने दलील दी कि यदि महिला सिपाही इन तिथियों में ड्यूटी कर रही थी तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दर्शाया गया मृत्यु का समय अभियोजन पक्ष की कहानी पर सवाल खड़ा करता है।
न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि महिला सिपाही 27, 28 और 29 जुलाई को ड्यूटी पर थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मृत्यु तीन से चार दिन पूर्व होने की ओर संकेत करती है।
ऐसे में मामले के तथ्य, मृत्यु के समय तथा शव की पहचान से जुड़े पहलुओं पर विचारण के दौरान गहन परीक्षण की आवश्यकता है।