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Barabanki News: अप्रशिक्षित चालकों के भरोसे नौनिहाल

Fri, 10 Apr 2026 01:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। जिले की सड़कों पर दौड़ रही कई स्कूली बसें बच्चों की सुरक्षा के सारे मानकों को दरकिनार कर रही हैं। नियम हैं कि चालक के पास भारी वाहन चलाने का लाइसेंस होना चाहिए। पांच साल का अनुभव होना चाहिए। पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है लेकिन जमीन पर हकीकत इससे जुदा है। कई बसों के चालक बिना लाइसेंस, बिना अनुभव और बिना पुलिस जांच के ही बच्चों को स्कूल ले जा रहे हैं। बसों में छात्राओं के लिए महिला अटेंडेंट या प्रशिक्षित कंडक्टर होना अनिवार्य है, लेकिन यह सुविधा शायद ही किसी बस में हो।
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अभिभावक जब इस गंभीर मुद्दे पर सवाल उठाते हैं तो चालक और स्कूल प्रबंधन जवाब देने की बजाय टालमटोल करते हैं। संवाद न्यूज एजेंसी की पड़ताल में स्कूली वाहनों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई सामने आ गई। बृहस्पतिवार को चलती बसों में बच्चे खिड़की से झांकते और बाहर हाथ निकालते नजर आए। बसों में इन्हें समझाने के लिए कोई अटेंडेंट नजर नहीं आया। अधिकारियों की चुप्पी और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही बच्चों की सुरक्षा के सारे मानक धता बता रही हैं। सीओ सिटी संगम कुमार ने कहा कि बस चालकों का वेरिफिकेशन कराना बेहद जरूरी है। स्कूल प्रबंधन को इस पर ध्यान देना चाहिए। जल्द ही अभियान चलाकर वेरिफिकेशन किया जाएगा।

लाइसेंस नहीं है तो क्या आप बनाएंगी...
एक महिला अभिभावक ने नाम छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल बस के चालक से पूछा कि आपके पास लाइसेंस है तो चालक ने कहा- नहीं है तो क्या आप बनाएंगी। हालांकि स्कूल प्रबंधन से शिकायत के बाद चालक को हटा दिया गया। ये प्रकरण सुरक्षा संग अनुशासन पर भी सवाल है।
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बसों में नहीं हैं महिला अटेंडेंट, प्रशिक्षित कंडक्टर

स्कूल बसों या वैन में महिला अटेंडेंट या प्रशिक्षित कंडक्टर नहीं है। पूर्व में चेकिंग के दौरान वैन में अकेली छात्रा मिलने पर एआरटीओ अंकिता शुक्ला ने वाहन सीज कर दिया था। इसकी खबर 24 सितंबर 2024 को अमर उजाला में प्रकाशित हुई थी। एआरटीओ ने बताया कि यदि वाहन में छात्रा है तो स्कूल प्रबंधन की ओर से महिला कर्मी होना आवश्यक है। इस घटना के बाद स्कूल प्रबंधकों को छात्राओं वाली बस में महिला अनुचर रखने के लिए पत्र भेजा गया लेकिन हालात जस के तस हैं।
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