नहाय खाय रस्म के साथ ही छठ पूजा की शुरुआत हो गई। महिलाओं ने नहाने के बाद पूरे दिन व्रत शुरू किया। नहाने के बाद पूजा-अर्चना के बाद लौकी की सब्जी व चने की दाल का भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया। घरों में शाम को छठ मइया के पारंपरिक गीत गूंजने लगे हैं।
बाजार में गागरा और सुथनी की खूब डिमांड रही। गागरा व सुथनी दोनों ही बिहार प्रांत में उत्पादित होने वाले फल हैं। छठ पूजा में इन फलों को विशेष रूप से चढ़ाया जाता है। सुथनी देखने में आलू जैसा होता है, इसका स्वाद शकरकंद जैसा मीठा होता है। वहीं गागरा मुसंमी जैसा होता है लेकिन इसका आकार काफी बड़ा होता है।
बाजार पहुंची महिलाओं ने पूजा में जरूरत की सामग्री कच्ची हल्दी, कच्ची अदरख, कच्ची गाजर, शकरकंद, आंवला, कैथा, कमरान, पनियाला, अनानास, गन्ना, सिंघाड़ा, शरीफा, केला, सेव, संतरा, कच्ची सुपारी आदि की खरीदारी की।
महिलाओं ने परंपरा के अनुसार नहाने के बाद पूजा अर्चना की और लौकी की सब्जी व चने की दाल स्वयं बनाया, उसका भोग लगाया और प्रसाद ग्रहण किया। शाम को घरों में महिलाओं ने छठ मइया के पारंपरिक गीत गाए। केरवा जे फरेला घवद से ओह पे सुगवा मंडराय.., कातिक मास अइले परब, नदी के घाट पे हमहूं अरघिया देबई हे छठि मइया.., हम न जइब दूसर घाट हे छठि मइया., हम छठ करबो न.. आदि पारंपरिक गीत गाए।