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हे छठ मइया पूरी करो हमार अरजिया...

Tue, 17 Nov 2015 11:32 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
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श्रद्धा से पटे नदी के घाट व तालाबों पर शाम के साढ़े चार बजते ही सूर्य उपासना के श्लोक गूंज उठे। निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं ने रेठ नदी के चिलहटा व आलापुर घाट पर मंगलवार की शाम चार बजे से करीब साढ़े पांच बजे तक शृंगार से भरे बांस व पीतल के कुल सूप लेकर चिलहटा घाट व व विभिन्न तालाबों पर पश्चिम की ओर मुंह करके अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और सिप-सोप्ता पर पूजा अर्चना कर भगवान सूर्य के सामने आंचल फैलाकर संतान की कामना व उनकी सलामती और परिवार में सुख-समृद्धि के लिए आराधना की।
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मंगलवार की शाम परंपरा के अनुसार महिलाओं ने सूर्यास्त के समय पहले से बनाए गए सिप-सोप्ता (मिट्टी से बनाया गया मंदिरनुमा गुंबद) की पूजा अर्चना की तथा पांच बार परिक्रमा की। नए कपड़े, नया सुहाग शृंगार कर महिलाओं ने ठेकुआ (अघरौटा) चढ़ाया तथा गन्ना, कच्ची हल्दी गागरा, सुथनी आदि पूजा के लिए एकत्र किए सामान से पूजा अर्चना की। इसके बाद पानी में उतर कर महिलाओं ने दीपकों की कतार जल मेें प्रवाहित की और माथे पर पीले सिंदूर का तिलक सजाकर अर्घ्य दिया और आंचल फैलाकर सूर्यदेव से पूरे परिवार की सलामती की दुआ मांगी।

मंगलवार की शाम बड़ी संख्या मेें महिलाएं व पुरुष बहंगी ( छठ का डाला) में बांस की सूपेली, सूप, गागरा, सुथनी, कच्ची अदरख, गाजर, शकरकंद, आंवला, कैथा, कमरान, पनियाला, गंगाजल, दूध, फूल आदि पूजन सामग्री लेकर नदी व तालाब किनारे पहुंचे। रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट व नागेश्वरनाथ मंदिर परिसर स्थित तालाब पर पूजा का आयोजन किया गया। छठ पूजा पर चिलहटा घाट, आलापुर घाट, नागेश्वरनाथ मंदिर स्थित तालाब, पीएसी बटालियन स्थित तालाब, सूत मिल स्थित तालाब समेत कई तालाबों पर व्रती महिलाओं की भीड़ रही।
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पूजा अर्चना के बाद महिलाओं के साथ आए बच्चों व बड़ों ने सिर पर कलसूप का पाटा रख कर घर तक पहुंचाया। फिर निर्जला व्रत धारण किए महिलाओं ने घर के आंगन में चौक (रंगोली) सजाकर पूजा की और छठ मइया के गीत- हे छठ मैया पूरी करो हमार अरजिया.., का चाही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय..., केरवा जे फरेला घवद से ओह पे सुगवा मंडराय.., कातिक मास अइले परब, हम छठ करबो न, पटना से लइबो जोड़ा नारियर, अरघ  देबो जरूर... गाए। रेठ नदी के चिलहटा घाट, आलापुर घाट व तालाबों पर उत्सव सरीखा माहौल रहा। व्रती महिलाएं सुबह चार बजे उगते सूरज की पूजा कर पारण करेंगी।
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