देवा (बाराबंकी)। बाल नृत्यांगना पर्णिका श्रीवास्तव ने देवा महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर विभिन्न गीतों पर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुतियां दीं। सबसे पहले पर्णिका ने सूफी गीत छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलायके... और मेरा मुरशिद खेले होली पर एक साथ... कथक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद अल्लाह हूं अल्लाह गीत पर मनमोहक प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर एसडीम नवाबगंज विजय त्रिवेदी, तहसीलदार सदर योगेंद्र सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता आशीष पाठक ने किया। वहीं लोकगायिका वंदना शुक्ला ने गणेश वंदना मेंं श्लोक वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः सुनाया। इसके बाद पारंपरिक पुरबिया गीत अंगुरी में डस ले पिया नगिनिया हो..., माथे पे लगाइके बिंदिया..., अवधी गीत सइयां मिले लरकइयां मैं का करूं..., सूफी गीत तेरी रहमतों ने हमको दर पर बुला लिया..., दमादम मस्त कलंदर..., मांझी गीत डोल रही लहरन मा नाव सहित कई अन्य गीत प्रस्तुत किए।
नृत्यांजलि समूह ने दीं मनमोहक प्रस्तुतियां
देवा (बाराबंकी)। नृत्यांजलि समूह की मनमोहक प्रस्तुति पर दर्शक तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन करते रहे। नृत्यांजलि समूह की निदेशिका रागिनी श्रीवास्तव अपनी भारतीय संस्कृति, शास्त्रीय एवं लोकनृत्य को बढ़ावा देने के लिए विशेष रूप से विगत कई वर्षों से कार्य कर रही हैं। ग्रुप के प्रशिक्षित कलाकारों की ओर से कई प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुुई। इसके बाद घूमर नृत्य एवं अवधी गीतों पर लोक नृत्य रितिका मिश्रा, दीपा अवस्थी, श्वेता गुप्ता, प्रज्ञा अवस्थी और निखिल ने किया। कार्यक्रम का समापन गरबा एवं डांडिया नृत्य से किया गया।
कव्वालों ने बांधा समां
देवा (बाराबंकी)। सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की मजार पर स्थित समांखाने में शुक्रवार को सुबह कव्वाली का आयोजन किया गया, जिसमें कव्वालों ने समां बांध दिया। इसके पश्चात खादिम अली शाह के कुल की रस्म अदा की गई। दोपहर बेदम शाह वारसी की ओर से सेहरा पेश किया गया। देर रात 11 बजे कव्वाली की महफिल सजी, जो रात भर जारी रही।