बाराबंकी। वाहन की गति को नियंत्रित करने और ब्लैक स्पॉट क्षेत्रों में ड्राइवरों को सतर्क करने के उद्देश्य से बनाए गए रिपीटेड बार मार्किंग आईआरसी के मानक के अनुरूप नहीं है। रिपीटेड बार मार्किंग ड्राइवर को पहले से चेतावनी देता है ताकि वह अपनी गति नियंत्रित कर सके। कई स्थानों पर रिपीटेड बार मार्किंग (स्ट्रिप) घिस गई हैं तो कहीं पता ही नहीं चलता। कई स्थानों पर कैट आई भी खराब पड़ी हैं।
लखनऊ-अयोध्या मार्ग पर रामसनेहीघाट का नरोखर मोड़ संभावित खतरनाक दुर्घटना क्षेत्र में शामिल है। नरोखर मोड़ के पास रिपीटेड बार मार्किंग घिस गई है। निगरानी न होने से सुधार कार्य भी नहीं कराया गया। नियमानुसार इन स्थानों पर रिपीटेड बार अलर्ट स्टि्रप उभरी होनी चाहिए ताकि जब वाहन उनके ऊपर से गुजरे तो चालक को विशेष कंपन महसूस हो और वह गति को कम कर ले।
मौजूदा समय में यह स्ट्रिप घिस चुकी है। इंडियन रोड कांग्रेस (आईआरसी) के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि प्रत्येक स्ट्रिप की ऊंचाई कम से कम 15 मिमी होनी चाहिए और इसमें उच्च गुणवत्ता वाले थर्मोप्लास्टिक पेंट व रिफ्लेक्टिव सामग्री का उपयोग अनिवार्य है। नरोखर मोड़ के पास लगाई गई कैट आई भी खराब पड़ी है।
खराब कैट आई रात के समय दृश्यता को कम करती हैं, जो दुर्घटना की आशंका को बढ़ाते हैं। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर अमर सिंह का कहना है कि वाहनों के लगातार आवागमन से अलर्ट स्ट्रिप घिस जाती है। इसकी निगरानी की जाती है और दुरुस्त कराया जाता है। जहां कमी पाई जाएगी, मानक के अनुरूप दुरुस्त कराया जाएगा।
ऐसी होती है रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप
रिपीटेड बार अलर्ट स्ट्रिप सड़क पर बनाई जाने वाली पीले रंग की समानांतर धारियां होती हैं, जो खासकर ब्लैक स्पॉट, तीखे मोड़, चौराहों या दुर्घटना वाले क्षेत्रों में बनाई जाती है। इनका उद्देश्य वाहन चालकोंं को आगे के खतरे के प्रति सचेत करना होता है ताकि वाहन चालक गति को नियंत्रित कर सके।