बाराबंकी। अगले महीने संभावित जैदपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव को लेकर सभी दलों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस और बसपा ने अपने-अपने प्रत्याशियों का एलान भी कर दिया है। भाजपा और सपा में टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है।
भाजपा का टिकट पाने के लिए सांसद की पत्नी, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और एक पूर्व आईएएस समेत 26 लोगों ने दावेदारी पेेश की है। वहीं सपा में भी टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है। यहां पर अपने-अपने गुट के लोगों को टिकट दिलाकर वर्चस्व कायम करने के लिए भीतर ही भीतर दांव चले जा रहे हैं।
जैदपुर सुरक्षित विधान सभा सीट पर 2017 में भाजपा के उपेंद्र रावत चुनाव जीते थे। लोकसभा चुनाव में पार्टी का टिकट पाकर वह सांसद बन गये। इससे रिक्त हुई इस सीट पर अक्तूबर में उपचुनाव होने की संभावना है।
प्रशासन और राजनीतिक दलों अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दीं हैं। सबसे पहले बसपा ने अखिलेश कुमार आंबेडकर को यहां से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इसके बाद कांग्रेस ने राज्यसभा सदस्य डॉ. पीएल पुनिया के पुत्र तनुज पुनिया को उम्मीदवार घोषित कर दिया है।
भाजपा और सपा ने अभी अपने प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है पर चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि भाजपा में टिकट को लेकर सबसे ज्यादा घमासान है। भाजपा सूत्रों के अनुसार 26 जिन लोगों ने टिकट के लिए दावेदारी की है।
उनमें पूर्व सांसद प्रियंका रावत के अलावा सांसद उपेंद्र रावत ने अपनी पत्नी, हैदरगढ़ विधायक बैजनाथ रावत ने अपने बेटे के लिए टिकट का आवेदन किया है। इतना ही नहीं पूर्व आईएएस राजेंद्र भौनवाल, पूर्व विधायक राजरानी रावत, अम्बरीश रावत और स्वराज रावत, शशांक कुशमेश, ऊषा गौतम, ऊषा रावत समेत कई लोग शामिल हैं।
टिकट पक्का करने के लिए यह सभी संभावित प्रत्याशी राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चक्कर लगा रहे हैं। टिकट को लेकर मचे घमासान के बीच पार्टी भले ही अभी किसी का ऐलान न कर रही हो किन्तु चुनावी तैयारी में वह पूरी तरह लग गई है।
प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव जहां बैठक ले चुके हैं वहीं 13 सितंबर को भाजपा संगठन महामंत्री चुनावी कार्यालय का उद्घाटन करने भी आ रहे हैं। तीन दिन बाद ही पूरे विधान सभा क्षेत्र में निकाली जाने वाली तिरंगा रैली को हरी झंडी दिखाने के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को आमंत्रित किया गया है। इस तरह बड़े कद वाले नेताओं के टिकट मांगने की होड़ में पार्टी कई खेमों में बटी नजर आ रही है।
समाजवादियों का गढ़ रही यह सीट पुन: कब्जाने के लिए पार्टी किस पर दांव लगाएगी यह तो अभी तय नहीं है फिर भी यहां से विधायक रहे रामगोपाल रावत, गौरव रावत ने दौड़ तेज की है। वहीं बसपा का टिकट घोषित होने के बाद इस पार्टी के पूर्व सांसद अपनी बेटे या बहू को लड़ाने के लिए सपा नेताओं के यहां आते-जाते देखे जा रहे हैं।
इस पार्टी में छिड़ी गुटबाजी टिकट को लेकर भी देखी जा रही है। किन्तु 2017 के चुनाव में ऐन वक्त पर कांग्रेस से समझौते में नामांकन के बाद मैदान छोड़ने वाले रामगोपाल रावत काफी सक्रिय दिख रहे हैं।