सैदनपुर (बाराबंकी)। पत्तागोभी के हाल टमाटर से भी ज्यादा खराब है। टमाटर की तरह ही लागत न निकल पाने से पत्ता गोभी की फसल भी खेतों में ही सूख कर खराब होने लगी है। ऐसे में लागत न निकल पाने से परेशान किसान पत्तागोभी को गो-आश्रय स्थलों पर हरे चारे के रूप में डेढ़ सौ रुपये क्विंटल के भाव से बेचने को विवश हो रहे हैं।
मरकामऊ के किसान श्यामू मौर्या ने बताया कि 10 हजार रुपये लागत लगाकर एक बीघे पत्ता गोभी उगाई थी। फसल खेत में तैयार है लेकिन कोई भी खरीदार नहीं मिल रहा। इसलिए मजबूरी में अब इसे निकट के गो-आश्रय केंद्र पर पशुओं के हरे चारे के रूप में 150 रुपये क्विंटल के भाव बेचना पड़ रहा है। इससे फसल उत्पादन की लागत तक नहीं निकल पा रही।
किसान देवेन्द्र कुमार ने बताया कि इस बार पत्ता गोभी का उत्पादन खूब हुआ है लेकिन फरवरी से ही तपिश बढ़ने के कारण यह खेतों में ही खराब होने लगी है। बाजार में कम खपत होने के मजबूरी में इसे थोक में डेढ़ सौ रुपये क्विंटल की दर से गोशाला को बेचना पड़ रहा है जबकि फुटकर में एक-डेढ़ किलो वजन पत्तागोभी तीन से चार रुपये प्रति पीस से ज्यादा की नहीं बिक रही। ऐसे में इस बार पत्तागोभी की खेती फायदे के बजाए नुकसान का सौदा साबित हुई है। इससे पहले अचानक बढ़ी गर्मी के कारण खेतों में ही पकने लगी टमाटर की फसल के कारण किसानों ने इसकी जोताई खेतों में ही करना शुरू कर दिया है।