बाराबंकी। सरकारी स्कूलों को मिलने वाली बजट राशि में अब हेरफेर करना बड़ी चुनौती बनेगा। नई व्यवस्था में अब न फाइलों का चक्कर होगा न कमीशन की गुंजाइश और न ही बजट का लटकाव। सरकारी स्कूलों में अब सीधे कोषागार से पैसा पहुंचेगा। पारदर्शिता लाने के लिए शासन ने एसएनए स्पर्श 2.0 व्यवस्था को लागू किया है। इस नई डिजिटल निगरानी से न केवल वित्तीय गड़बड़ियों पर ब्रेक लगेगा बल्कि योजना से जुड़ी पाई-पाई असली हकदार तक पहुंचेगी।
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों और प्रधानाध्यापकों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस व्यवस्था में बीएसए को जनपदीय एडमिन और वित्त एवं लेखाधिकारी को आहरण-वितरण अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्कूल स्तर से अपलोड होने वाले बिल सीधे एडमिन के माध्यम से कोषागार को जाएंगे, जिससे फाइलों में होने वाली देरी से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी। नई व्यवस्था में वेंडर या किसी भी लाभार्थी को जोड़ते समय बैंक विवरण की शत-प्रतिशत शुद्धता परखना अनिवार्य होगा। स्कूल के प्रधानाध्यापक को संबंधित खातों व पासबुक की हार्ड कॉपी अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखनी होगी। बैंक विवरण में किसी भी तरह का अंतर या हेरफेर मिला तो सीधे बीईओ और संबंधित प्रधानाध्यापक की जवाबदेही तय होगी।
इस तरह होगा भुगतान
पुरानी व्यवस्था में बजट आवंटन के बाद भी भुगतान लंबे समय तक बैंकों में अटका रहता था। अब डिजिटल सत्यापन के बाद ई-क्लेम फाइल सीधे सर्वर से पी एफ एम एस को भेजी जाएगी। वहां से अनुमति मिलते ही भारतीय रिजर्व बैंक की ई-कुबेर प्रणाली से सीधे संबंधित व्यक्ति या वेंडर के खाते में धनराशि ट्रांसफर हो जाएगी। बीएसए नवीन कुमार पाठक ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार जिले में एसएनए स्पर्श 2.0 व्यवस्था कड़ाई से लागू की जा रही है। इससे अनुदानित राशि के भुगतान में पारदर्शिता आएगी और बैंक विवरण की गलत फीडिंग पर बीईओ व प्रधानाध्यापक कार्रवाई के घेरे में आ सकेंगे।