गेहूं किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए उन्हें क्रय केंद्र पर पहुंच पहले ही टोकन ले लेना चाहिए जिससे गेहूं बेचने के लिए उन्हें अपनी बारी आने का इंतजार न करना पड़े।
वहीं गेहूं बेचने वाले किसानों को भुगतान सीधे उनके खाते में किया जाएगा इसके लिए जरूरी नहीं है कि बैंक खाता आधार से लिंक हो। बैंकों को जो कोड मिलता है भुगतान के लिए वहीं पर्याप्त है। क्रय केंद्र पर गेहूं लाने से पहले किसानों को कई बातों का विशेष ध्यान रखना होगा।
किसानों से क्रय किए गए गेहूं का भुगतान रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) के माध्यम से किया जाएगा। किसान गेहूं तौल के दौरान जो पासबुक देगा उस पर बैंक का कोड होता है। किसानों के खाते में पैसा का भुगतान करने के लिए इतना ही पर्याप्त है।
अक्सर देखा गया है कि किसान बिना जानकारी लिए ही ट्रॉलियां लेकर चला जाता है जिससे उसे कई-कई दिनों तक क्रय केंद्रों पर खडे़ रहना पड़ता है। इससे किसान भी परेशान होता है और तौल भी प्रभावित होती है।
इस समस्या से बचने के लिए किसानों को निकट के गेहूं खरीद केंद्र पर जाकर टोकन प्राप्त कर लेना चाहिए और जिस दिन क्रय केंद्र प्रभारी बताए उसी दिन गेहूं लेकर क्रय केंद्र पर जाना चाहिए। इससे उसका गेहूं समय से तौल जाएगा और किसी प्रकार की कोई समस्या भी नहीं होगी।
इसके अलावा किसानों को साफ सुथरा और गुणवत्तापरक गेहूं क्रय केंद्रों पर लाना चाहिए जिससे उसे आसानी से क्रय केंद्र प्रभारी तौल सके। अक्सर देखा जाता है कि भूसा और डस्ट युक्त गेहूं किसान क्रय केंद्र पर लेकर आ जाते हैं जिसे वापस करना क्रय केंद्र प्रभारियों की मजबूरी बन जाता है।