सिंचाई विभाग द्वारा नहर में पानी छोड़े जाने का बहाव बड़ेल खारजा पर भ्रष्टाचार की बुनियाद पर बना पुल झेल नहीं सका। पानी के साथ सोमवार की सुबह पुल भी बह गया। इस पुल का निर्माण 21 लाख रुपये की लागत से जिला पंचायत ने कराया था। सोमवार की सुबह पुल बहने की सूचना पर डीएम, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता व अधिशासी अभियंता पहुंचे। पुल निर्माण को लेकर डीएम ने जांच के आदेश दिए हैं।
हाईवे से कुछ दूरी पर बड़ेल खराब पर पुल बनाने की अनुमति सिंचाई विभाग ने 22 सितंबर 2016 को जिला पंचायत को दी थी। लेकिन शर्त रखी कि पुल का निर्माण सिंचाई विभाग के अधिकारियों की देख-रेख में होगा। वहीं अनुमति मिलते ही दिसंबर माह में पुल का निर्माण जिला पंचायत के ठेकेदार विजय कुमार ने शुरू करा दिया। पुल के निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई।
सूत्रों की मानें तो पुल निर्माण में डेड लेवल से 1.8 मीटर नीचे से पिलर नहीं बनाया गया तो तलहटी में सेफ्टी फर्श भी नहीं बनाई गई। जो पिलर बने भी थे। उसमें ईंट की गिट्टी का प्रयोग किया गया था। जिस कारण पानी छोड़ने के बाद ही पुल धराशाई हो गया। पुल ढहने के साथ पास में स्थित झरना भी बह गया। दो माह पूर्व से इस पुल पर आवागमन हो रहा है।
उधर, सिंचाई विभाग ने जेसीबी से खारजे की खुदाई तो करा दी। लेकिन झरने की सफाई नहीं कराई थी। जिसके कारण झरने के बगल से मिट्टी का कटाव पूर्व में भी पानी छोड़ने के बाद हुआ था। जिसकी सूचना पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण किया पर आगे कुछ नहीं हुआ।
पुल ढहने के बाद मंगलवार की दोपहर डीएम अखिलेश तिवारी, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता कमलेश्वर सिंह व सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरएन सिंह मौके पर पहुंचे। इस मामले की जांच के आदेश डीएम ने एसडीएम सदर को दिया है।
पुल के साथ बादीनगर का झरना भी बहा
बाराबंकी शहर व आस-पास के गांवों का पिकनिक स्पाट बना बादीनगर का झरना भी पुल के साथ बह गया। वैसे तो हर मौसम में शहर के युवाओं की पसंद में झरना शुमार था। मगर, गर्मियों में तो झरने पर भारी संख्या में युवाओं की भीड़ लगती थी। हमेशा इस स्थल पर रहने वाली चहल-पहल झरने के बह जाने के बाद उजाड़ नजर आऐगी।
खारजा पर पुल निर्माण कराने की अनुमति सितंबर 2016 में दी गई थी। मगर, जिला पंचायत ने मुझे सूचना दिए बगैर पुल का निर्माण दिसंबर माह से शुरू करा दिया। चुनाव में व्यस्तता के कारण इस ओर ध्यान नहीं दिया गया और पुल के निर्माण के बाद आवागमन भी शुरू हो गया। -कमलेश्वर सिंह, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग लखनऊ
पुल का निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ था। यह पुल सिंचाई विभाग की अनुमति के बाद बनाया जा रहा था। पुल निर्माण की सूचना पत्र द्वारा सिंचाई विभाग को दी गई थी। उसके बाद भी तेज बहाव से पानी छोड़ा गया। -अनामिका सिंह, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत बाराबंकी।