बाराबंकी। रफी अहमद किदवई जिला अस्पताल की इमरजेंसी के हालात सुधर नहीं रहे हैं। कुछ दिन पहले उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने निरीक्षण किया था, उनके निर्देश के बावजूद समस्याएं कम नहीं हुईं। अव्यवस्थाएं किस कदर हावी हैं, इसका अंदाजा शनिवार की रात एक बजे इमरजेंसी कक्ष के हालात से लगाया जा सकता है। बुजुर्गों को स्ट्रेचर पर भर्ती कर इलाज किया गया।
देवा क्षेत्र के भिटौली निवासी 66 वर्षीय नौमीलाल सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हाथ-पांव की हड्डी टूटी थी। देवा सीएचसी से रेफर कर दिए जाने पर शनिवार शाम पांच बजे इमरजेंसी लाए गए लेकिन रात एक बजे तक स्ट्रेचर पर ही पड़े रहे। बेड नहीं मिला। नौमीलाल ने बताया कि लोहे के स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे पीठ अकड़ गई है पर मजबूरी है।
बगल में दूसरे स्ट्रेचर पर सतरिख क्षेत्र के करौंदी गांव निवासी करीब 65 वर्षीय अवधरानी भी लेटी दिखीं। उनकी बहू ने बताया कि शनिवार शाम चार बजे एक पेड़ गिरने से वह घायल हो गई हैं। शाम पांच बजे इमरजेंसी में लाया गया था, तब से स्ट्रेचर पर ही इलाज चल रहा है।
दरियाबाद के राजेंद्र इमरजेंसी के बरामदे में लेटे दिखे। हाथ में वीगो लगा था। उनकी पत्नी ने बताया कि किडनी में इंफेक्शन है। तबीयत ज्यादा खराब होने पर यहां लाए, एक बोतल ग्लूकोज चढ़ने से आराम मिला है। बेड मिला नहीं, इसलिए यहां लेटे हैं।
सतरिख क्षेत्र के ठाकुरपुरवा मजरे बहलोलपुर गांव निवासी मुकेश यादव (26) लहूलुहान अवस्था में स्ट्रेचर पर पड़े दिखे, नाक से खून बंद नहीं हो रहा था। फार्मासिस्ट ने देखते ही लखनऊ रेफर करने की बात कही। परिवार के कई सदस्य रोते हुए परेशान दिखे। कोई कह रहा था कि यहां से जल्दी निजी अस्पताल ले चलो, तो कोई लोहिया अस्पताल लखनऊ या केजीएमयू लखनऊ रेफर कराने की सलाह दे रहा था।
एक परिजन ने 108 एंबुलेंस को फोन किया और लखनऊ ले जाने का इंतजाम करने लगे। परिजन बार-बार रुमाल से खून पोंछ रहे थे। परिजनों ने बताया कि रात 12 बजे अचानक बारिश होने लगी। मुकेश हड़बड़ाकर छत से उतरने के चक्कर में गिरकर जख्मी हो गए।
मुकेश के बगल में बंकी निवासी जयसिंह का रिश्तेदार सुनील भी छत से गिरने के कारण लहूलुहान अवस्था में व्हील चेयर पर बैठा ग्लूकोज चढ़वाता दिखा। धरसनिया के आकाश ने नशे में उत्पात मचाया था, इसलिए पिता व भाई ने उसकी पिटाई कर दी थी। गंभीर चोट लगने से वह लहूलुहान अवस्था में स्ट्रेचर पर ही पड़ा कराह रहा था।
बेड फुल होने से इमरजेंसी में दिक्कत
बेड फुल होने से इमरजेंसी में स्ट्रेचर पर इलाज करने की विवशता होती है। जैसे ही बेड खाली होता है, मरीज को दे दिया जाता है।
-डॉ. वीपी सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल