बाराबंकी। जिला अस्पताल में रविवार को अवकाश होने के चलते ओपीडी बंद रही तो मरीज इलाज के लिए इमरजेंसी में पहुंचे। वहां मरीजों काे इलाज तो मिला लेकिन कई घंटे तक बिना शीट के स्ट्रेचर एवं बेंच पर लिटाए रखा गया।
ये हालात तब थे जब इमरजेंसी के ठीक बगल में बनेे ट्रॉयज रूम संख्या नौ में तीन बेड खाली पड़े हुए थे। रूम नंबर 11 में छह में से दो बेड खाली थे। बेड न मुहैया कराए जाने के चलते मरीज के साथ उनके तीमारदारों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
इसी तरह जिला महिला अस्पताल में भी इमरजेंसी में आने वाले मरीज डॉक्टर को दिखाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे। अमर उजाला ने अस्पतालों की पड़ताल कराई तो एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली खुलकर सामने आई।
स्ट्रेचर पर लिटाकर चढ़ाई ड्रिप
जिला अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर हाल में सुबह 11.05 बजे सतरिख के मजीठा निवासी रामू की पुत्री माही (13) को बिना शीट के स्ट्रेचर पर लिटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही थी। किशोरी को सीने में दर्द के साथ बेहोशी की समस्या थी।
साढ़े तीन घंटे स्ट्रेचर पर लेटा रहा मासूम
हरख ब्लॉक के तमरसेपुर निवासी राजकुमार अपने पुत्र कार्तिक (5) को रविवार सुबह करीब आठ बजे जिला अस्पताल की इमरजेंसी लेकर आए थे। इमरजेंसी के बाहर बेंच पर लिटाकर ड्रिप लगा दी गई। सुबह 11.25 बजे तक स्ट्रेचर पर ही इलाज होता रहा।
पर्चा बनवाने में 23, दिखाने में लगे 90 मिनट
जैदपुर के लतपुरवा के लवकुश अपनी नौ दिन की पुत्री प्रिया को दिखाने के लिए दोपहर 12 बजे जिला महिला अस्पताल पहुंचे थे। पर्चा बनने में 23 मिनट लगे। दोपहर 1.27 बजे के करीब डेढ़ घंटे इंतजार के बाद डॉक्टर ने उसे देखा और तीन मिनट बाद सलाह देकर ओटी चले गए।
-वर्जन
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भर्ती करने करने के लिए ट्रॉयज रूम बने हुए हैं। ज्यादातर बेड फुल रहते हैं। अगर बेड खाली होने के बाद भी स्ट्रेचर पर भर्ती किया है तो इसकी जांच कराएंगे।
-डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस