बाराबंकी। जिला अस्पताल की इमरजेंसी..., सोमवार सुबह करीब 11 बजे। अंदर घुसते ही स्ट्रेचर पर लेटे मरीज बेहाल हो रहे थे। कोई एक दिन पहले से स्ट्रेचर पर लेटा था तो किसी को दूसरे मरीज के स्ट्रेचर पर बैठा कर ग्लूकोज की बोतल टांग दी गई थी। कमरा नंबर सात में ब्लड प्रेशर की जांच, इंजेक्शन और पट्टी आदि होती है। जिस कक्ष में डॉक्टर बैठते हैं, उसमें एक छोटी सी खिड़की से अंदर खड़े स्वास्थ्य कर्मचारी और फार्मासिस्ट मरीजों से उनकी परेशानी पूछ रहे थे। सारे बेड फुल थे।
अभयनगर की काशीराम कॉलोनी निवासी वृद्धा को रेफर किया जा रहा था। महिला ने बताया कि तीसरी बार रेफर किया गया है। इमरजेंसी में डॉक्टर और स्थायी कर्मचारियों से ज्यादा मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र और निजी कर्मी इलाज कर रहे थे। जबकि यहां पर जिनकी ड्यूटी लगी थी, वह मौजूद नहीं थे। पढ़े-लिखे और पहुंच वाले लोग तो इलाज के लिए मंत्री विधायक तक का फोन करा देते हैं। हाल यह है कि पिछले डेढ़ साल से जिला अस्पताल में हृदय रोग का डॉक्टर तक नहीं है। बढ़ती सर्द में हृदय रोगी इमरजेंसी पहुंचेंगे तो क्या होगा, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
दूसरे दिन भी वृद्धा को नहीं मिला बेड
हरख ब्लॉक के निरऊमऊ की वृद्धा तुलसा देवी रविवार की रात आठ बजे गंभीर हालत में जिला अस्पताल की इमरजेंसी लाई गई थीं। एक बार स्ट्रेचर पर लेटी तो बेड ही नहीं मिला। सोमवार को दूसरे दिन भी स्ट्रेचर पर ही लेटी रहीं, जिससे करवट लेना मुश्किल था।
ठीक होने से पहले अस्पताल से छुट्टी
सतरिख थाना क्षेत्र के नरौली गांव के आशीष कुमार बुखार, पेट दर्द और दस्त से परेशान होकर रविवार को सुबह इमरजेंसी में लोहे की बेंच पर भर्ती किए गए। सोमवार की शाम तक स्ट्रेचर पर लेटे रहे। मजबूरी में करीब चार बजे डिस्चार्ज होना पड़ा।
एक स्ट्रेचर, दो मरीज, बैठाकर लगा दी ग्लूकोज
वजीराबाद की बच्ची अंकिता को तेज बुखार था। वह स्ट्रेचर पर भर्ती थी। इस दौरान स्ट्रेचर भी नहीं मिलने के कारण एक वृद्धा को अंकिता के स्ट्रेचर पर ही बैठकर ग्लूकोज लगा दिया गया। एक महिला इन्हें संभाल रही थी।
फर्श पर बिठाकर लगा दिया इंजेक्शन
फर्श पर बैठे जैदपुर के रामकरन ने बताया कि उनका पैर टूट गया है। वार्ड बॉय ने यहीं पर आकर इंजेक्शन लगा दिया गया। कहा कि स्ट्रेचर खाली नहीं है, कुछ देर बाहर बैठकर इंतजार करो। डेढ़ घंटे से बैठा हुआ हूं, लेकिन अभी तक बेड नहीं मिला है।
इमरजेंसी में आने वाले मरीज का प्राथमिक उपचार स्ट्रेचर पर ही किया जाता है। राहत मिलने के बाद ही उसे वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। बेड की कमी के चलते कुछ दिक्कतें होती हैं। इसके बावजूद इमरजेंंसी में आने वाले मरीजाें को बेहतर उपचार की सुविधा मिले, इसका पूरा प्रयास रहता है।
डॉ. ब्रजेश कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल