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Barabanki News: बंदिशों को चुनौती देकर बनीं बिजली वाली दीदी

Tue, 23 Jun 2026 01:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। ग्रामीण समाज की परंपरागत सोच और पारिवारिक संकोच को पीछे छोड़ते हुए रामनगर क्षेत्र की राजश्री शुक्ला ने आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो अब अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कभी घर से बाहर निकलकर काम करने पर सवाल उठाने वाले लोग आज उनकी सफलता की चर्चा करते नहीं थकते।
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स्वयं सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने विद्युत सखी के रूप में काम शुरू किया और आज हर महीने 40 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। वर्ष 2018 में विवाह के बाद राजश्री ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और परास्नातक की शिक्षा पूरी की। वर्ष 2019 में गांव में गठित राधा स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद वर्ष 2021 में उन्होंने विद्युत सखी बनने का निर्णय लिया।
शुरुआत आसान नहीं थी। गांव और परिवार के कुछ लोगों ने महिलाओं के घर-घर जाकर काम करने पर आपत्ति जताई, लेकिन राजश्री ने हिम्मत नहीं हारी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से मिली सहायता से आवश्यक संसाधन जुटाए और बिजली उपभोक्ताओं के बिल जमा कराने का कार्य शुरू कर दिया।
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धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई। वर्तमान में वह हर महीने करीब 2300 से 2400 उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कराती हैं। इसके बदले मिलने वाले कमीशन से उनकी मासिक आय 40 हजार रुपये से अधिक पहुंच गई है।

महिलाओं को भी दिखाया आत्मनिर्भरता का रास्ता
राजश्री केवल खुद तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने क्षेत्र की कई महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनके प्रयासों से अनेक महिलाएं आर्थिक गतिविधियों में शामिल होकर आत्मनिर्भर बनने की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

बिजली वाली दीदी के नाम से मिली पहचान
बेहतर कार्यशैली और लगातार सक्रियता के कारण राजश्री को क्षेत्र में लोग अब बिजली वाली दीदी के नाम से पहचानने लगे हैं। विभिन्न मंचों पर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है। उनकी पहचान बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच भी एक सक्रिय विद्युत सखी के रूप में बनी है।

विरोध से सम्मान तक का सफर
राजश्री के पति हिमांशु त्रिवेदी बताते हैं कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब कई लोग तरह-तरह की बातें करते थे। आज वही लोग उनकी उपलब्धियों की सराहना करते हैं। कई जगह सम्मानित भी हुईं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ राजश्री शुक्ला ने यह साबित किया है कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई इबारत लिख सकती हैं।
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