बाराबंकी। सतरिख थाना क्षेत्र के कमरपुर सरैंया गांव में शनिवार को संपत्ति का बंटवारा करने से मना करने पर गुस्साए पुत्र ने बुजुर्ग पिता को लाठी से पीटकर मार डाला। मां के सामने ही पिता की हत्या करने के बाद वह भाग गया। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बुजुर्ग के दूसरे पुत्र की तहरीर पर आरोपी पुत्र के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। देर शाम पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
सतरिख थाना क्षेत्र के कमरपुर सरैंया गांव निवासी बिशुन यादव (70) के छह पुत्र व एक पुत्री है। दो पुत्रों व पुत्री का विवाह हो चुका है। इनका गांव में पुश्तैनी मकान है, मगर बीते पांच साल से बिशुन यादव व उनकी पत्नी शिवदेवी गांव से करीब एक किमी दूर ईंट-भट्ठे के पास सरकार द्वारा मिले आवास में रहते थे। इनके तीसरे नंबर का पुत्र शिवराज इधर-उधर घूमा करता था। वह हमेशा पिता के नाम दर्ज छह बीघा जमीन व मकान में बंटवारे का मांग करता था।
पुलिस के अनुसार शनिवार को करीब ढाई बजे शिवराज अचानक पिता के घर पहुंचा। उसने बंटवारे की बात की तो बिशुन ने मना कर दिया। इसी को लेकर वह नाराज हो गया। कहासुनी के दौरान शिवराज ने लाठी से पिता पर हमला कर दिया। इससे बुजुर्ग का सिर फट गया और खून निकलने लगा। यह देख वहां मौजूद शिवदेवी बदहवास हो गई और शिवराज भाग खड़ा हुआ। कुछ देर तो दहशत के चलते शिवदेवी के मुंह से आवाज नहीं निकली।
इसी दौरान पास के ही ईंट-भट्ठे पर काम करने वाला सबसे छोटा पुत्र हरिश्चंद्र वहां पहुंचा तो रोते हुए वृद्धा ने घर के अंदर इशारा किया। अंदर बुुजुर्ग का रक्तरंजित शव पड़ा था। पास में ही खाने से भरी थाली रखी थी जिससे लगता है कि बुजुर्ग खाना खाने जा रहा था। मौके पर पहुंची पुलिस ने वृद्धा शिवदेवी से घटना की जानकारी ली। सीओ सदर सुमित त्रिपाठी भी पहुंचे। थानाध्यक्ष अमर कुमार चौरसिया ने बताया कि बिशुन के सबसे छोटे पुत्र हरिश्चंद्र की तहरीर पर हत्या का केस दर्ज किया गया है।
तीन साल पहले भी पिता को किया था जख्मी
पुत्र की हैवानियत के शिकार हुए बुजुर्ग बिशुन यादव के छह पुत्र देशराज, राममिलन, शिवराज, हंसराज, भुल्ली व हरिश्चंद्र व एक पुत्री है। इसमें पुत्री के साथ दो पुत्रों देशराज व राममिलन का विवाह हो चुका है। देशराज अपनी ससुराल शहर कोतवाली क्षेत्र के उरगदिया गांव में रहता है। शिवराज मजदूरी भी करता था, मगर पैसे शराब में उड़ा देता था। नशेबाजी के चक्कर में उसके गले में कुछ परेशानी थी, जिससे उसे बोलने में परेशानी होती थी। बिशुन के नाम छह बीघा जमीन थी। शिवराज तीन साल से पिता से बंटवारे की मांग कर रहा था मगर अपने जीते जी बिशुन बंटवारा नहीं चाहते थे। इसीलिए वह दूसरे मकान में रहकर जानवर पालकर अपनी राेजी रोटी चलाते थे। तीन साल पहले ही शिवराज ने पिता की पिटाई कर जख्मी कर दिया था। बीते 15 दिनों से शिवराज पिता के साथ ही रह रहा था।