बाराबंकी। बाढ़ पीड़ितों को इस बार तटबंधों या स्कूलों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। बाढ़ पीड़ितों के लिए रामनगर तहसील के बतनेरा में आश्रय स्थल बनकर तैयार है। यहां पर एक साथ करीब 300 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। इसके अलावा अन्य तहसीलों में अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं। यहां पर भोजन पानी आदि की भी सुविधा रहेगी।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जब सरयू नदी में बाढ़ आती है तो रामनगर का यही वह इलाका जो सबसे पहले प्रभावित होता है। इसके बाद सरयू नदी का पानी सिरौलीगौसपुर और रामसनेहीघाट के गांवों को अपनी चपेट में लेती है। इन तीनों तहसीलों की करीब 35 से 40 हजार की आबादी और करीब चार दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित होते हैं।
प्रशासन ने इस बार बाढ़ आने से पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। पीड़ितों को ठहराने के लिए इस बार 22 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं और इनकी सुरक्षा के लिए 10 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। बाढ़ से बचाव और लोगों में जागरूकता लाने के लिए राहत चौपालें भी शुरू की जा रही हैं।
ऐसे में अचानक नदी में पानी बढ़ता है तो लोगों को किस तरह से बचाव करना है इसकी भी जानकारी इन चौपालों में लोगों को दी जाएगी।
पशुओं को भी मिलेगा सहारा
बाढ़ से प्रभावित गांवों के पशुपालकों को इस बार चारा-पानी के संकट से जूझना नहीं पड़ेगा। शासन के आदेश पर प्रशासन ने इसके लिए भी व्यवस्था की है। इस बार पशुओं के लिए भी 10 शिविर बनाए गए हैं। जहां पर पशुओं को सुरक्षित रखा जाएगा और यहां पर चारा-पानी की सुविधा भी होगी।
वर्जन
बाढ़ पीड़ितों के लिए बतनेरा में आश्रय स्थल बनकर तैयार है। इसके अलावा अन्य तहसीलों में 22 बाढ़ राहत शिविर बनाए गए हैं। बाढ़ पीड़ितों किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका पूरा प्रयास प्रशासन की ओर से किया जाएगा।
- निरंकार सिंह, अपर जिलाधिकारी