बाराबंकी। जब सिर गिनने से ज्यादा हाथ गिनने पर भरोसा हो, तब बढ़ती आबादी बोझ नहीं ताकत बन जाती है। करीब 4400 वर्ग फिट किमी क्षेत्रफल में फैले बाराबंकी जिले ने इसे सही साबित कर दिखाया है। जिले की आबादी 1991 में 21.12 लाख थी, जो वर्ष 2011 में 32.62 लाख और वर्तमान में 40 लाख से अधिक है। मात्र 35 साल में ही जिले की जनसंख्या में दो गुना तक वृद्धि दर्ज हुई। यह जिले के लिए बोझ नहीं वरन ताकत बनी दिखी।
जनसंख्या बढ़ने के बाद भी हुए चहुमुखी विकास के कारण जिला मेंथा का सबसे बड़ा उत्पादक बना। साथ ही साल भर में किसान चार फसलों की पैदावार भी करने लगे हैं। विकसित होते बाराबंकी को राजधानी लखनऊ से जुड़ाव के कारण राज्य राजधानी क्षेत्र में शामिल किया गया है। 2005 में बाराबंकी में केवल 12 डिग्री कॉलेज थे। 20 साल बाद अब 70 से अधिक महाविद्यालय संचालित हैं। वर्ष 2005 में सफेदाबाद मेें पहला तो 2012 में दूसरे निजी मेडिकल कॉलेज के साथ ही निजी रामस्वरूप युनिवर्सिटी भी खुल गई। इनके साथ ही करीब 15 इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों के साथ ही पैरामेडिकल व नर्सिंग की पढ़ाई भी हो रही है। (संवाद)
एक्सप्रेसवे समेत दो हाईवे, 6 हजार किमी लंबी हुईं सड़कें : लखनऊ-बाराबंकी अयोध्या मार्ग 2012 में यह फोर लेन बन गया। रोजाना तीस हजार से अधिक वाहन इस हाईवे से गुजरते हैं। बाराबंकी-बहराइच फोरलेन हाईवे भी पास हो गया है। माती क्षेत्र से किसान पथ गुजरा। वर्ष 2000 में मौजूद 3300 किमी लंबी सड़के अब बढ़कर 6000 किमी तक हो गई हैं।
20 साल में नौ गुना बिजली कनेक्शन : 2005 से पहले जिले के 1800 से अधिक राजस्व गांवों में से 567 गांव बिजली से वंचित थे। विद्युत निगम के अनुसार वर्ष 2001 में जिले में जहां करीब 50 हजार बिजली कनेक्शन थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर चार लाख 60 हजार के आसपास पहुंच चुकी है।
60 से 130 हुईं ट्रेनें, तीसरी व चौथी लाइन भी : रेल लाइनों का चेहरा अब पूरी तरह बदल रहा है। बाराबंकी से अयोध्या के बीच रेलवे लाइन अब डबल ट्रैक के साथ बिजली चलित हो चुकी है। लखनऊ–बाराबंकी खंड पर तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण तेजी से जारी है। बाराबंकी से गोंडा, गोरखपुर होते हुए छपरा तक तीन से चार लाइन बनाने का प्रस्ताव भी है। 20 साल में ट्रेनों की संख्या दोगुनी होकर करीब 130 हो गई। (संवाद)