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Barabanki News: हजारों विदेशी पक्षियों की जन्मभूमि बनी बाराबंकी, प्रजनन शुरू

Mon, 29 Jan 2024 03:12 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
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बाराबंकी। पंछी, नदिया, पवन के झोंके, कोई सरहद ना इन्हें रोके...। जी हां, गीतकार जावेद अख्तर की यह लाइनें जिले में सार्थक होती दिख रही हैं। सात समंदर पार करके आए हजारों विदेशी पक्षी जिले की झीलों में कलरव कर रहे हैं। लेकिन सबसे सुखद यह है कि भगहर व सराय बरई जैसी बड़ी झीलों व आसपास का माहौल इन विदेशी मेहमानों को प्रजनन के लिए भी सबसे मुफीद जगह साबित हो रहा है। ये झीलें हजारों विदेशी पक्षियों की जन्मभूमि बन गई हैं।
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साइबेरिया, आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, रूस, जापान, तिब्बत समेत कई देशों में दिसंबर से फरवरी तक इतनी ठंड होती है कि पक्षियों का बसर करना मुश्किल हो जाता है। हिमपात के कारण ग्रेलैग हंस, कारमेंट, ओपेन बिल्ड स्टार्क, ब्रहानी डक, डेवसिक, ब्लू चील्ड बीटर, ब्लैक टर्न, कामन टील व कामन रेड जैसे हजारों पक्षी अपना देश छोड़कर कम ठंडे स्थानों की ओर जाते हैं। जिले के फतेहपुर रेंज की भगहर झील, रामसनेहीघाट की सराय बरई झील, हैदरगढ़ की नरदही झील, बेलहरा की किरकिच्ची समेत कई झीलें हैं, जहां पर सर्दी के मौसम में हजारों विदेशी पक्षी पहुंच जाते हैं। इस दौरान ये प्रजनन करते हैं। अंडों से बच्चे निकलने तक इनकी देखभाल होती है।


कुछ दिन के लिए यह झील के आसपास झाड़ियों व पेड़ों में घोंसला बना लेते हैं। गर्मी की दस्तक होते ही यह बच्चे उड़ने लायक हो जाते हैं। अपने स्वदेश लौटते वक्त इनके उड़ान की परीक्षा भी होती है। हर साल हजारों पक्षियों की जन्मभूमि बाराबंकी की झीलें व वेटलैंड बनते हैं। फतेहपुर वन क्षेत्र के रेंजर पीके सिंह ऐसे पक्षियों की तस्वीरों का संकलन दिखाते हैं। वे कहते हैं कि ग्रामीणों को जागरुक किया जा रहा है कि इन्हें कोई नुकसान न पहुंच सके।
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विदेशी पक्षियों को जिले की कुछ झीलें काफी भा रही हैं। यहां आकर वे प्रजनन करते हैं। सराय बरई में वर्तमान में ग्रेलैग हंस जैसे पक्षियों की आमद खूब है। यहां पर प्रजनन भी हो रहा है। यह प्रवासी पक्षी इस बात का संदेश भी देते हैं कि पूरी दुनिया इनके रहने के लिए है।
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- आकाश बाधवान, डीएफओ
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