एसएसबी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने प्रतिबंधित वन संपदा की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 15 लाख रुपये कीमत की सफेद चंदन की लकड़ी के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से आठ बोटा चंदन की लकड़ी, एक कार और एक बाइक बरामद हुई है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि लकड़ी को इत्र कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचाया जाना था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कानपुर निवासी सुशील पांडेय और सत्येंद्र सिंह तथा कन्नौज निवासी महेश के रूप में हुई है। तीनों को वनकटवा रेंज कार्यालय लाकर उनके खिलाफ वन अधिनियम की धाराओं में कार्रवाई की गई। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बरामद लकड़ी सफेद चंदन की है, जिसकी बाजार में काफी मांग रहती है। इसका उपयोग इत्र, धूप, अगरबत्ती, पूजन सामग्री और अन्य सुगंधित उत्पाद बनाने में किया जाता है। अधिक मांग और कम उपलब्धता के कारण इसकी कीमत बहुत अधिक होती है।
वनकटवा रेंज के रेंजर शत्रुघ्न लाल ने बताया कि एसएसबी को सूचना मिली थी कि कुछ लोग लाल रंग की कार से चंदन की लकड़ी ले जा रहे हैं। सूचना के आधार पर एसएसबी और वन विभाग की टीम ने हरैया थाना क्षेत्र के चौधरीडीह में घेराबंदी कर दी।
कुछ देर बाद सिरसिया की ओर से आ रही एक कार और उसके आगे चल रही बाइक को रोकने का प्रयास किया गया। टीम को देखकर वाहन सवार भागने लगे, लेकिन जवानों ने उन्हें पकड़ लिया। तलाशी के दौरान कार से आठ बोटा सफेद चंदन की लकड़ी बरामद हुई। आरोपी लकड़ी के परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा सके।
इत्र कारोबार से जुड़ सकता है तस्करी का नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि लकड़ी की खेप कन्नौज ले जाई जा रही थी। आरोपी कई दिनों से बलदेवनगर में किराये के मकान में रह रहे थे और सोहेलवा जंगल से सटे क्षेत्रों में संपर्क कर लकड़ी एकत्र कर रहे थे। अधिकारियों को आशंका है कि यह मामला किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। प्रभारी निरीक्षक हरीश सिंह ने बताया कि सीमावर्ती और वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाया जा रहा है कि लकड़ी कहां से लाई गई और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
इसलिए महंगा होता है सफेद चंदन
- इत्र और सुगंधित उत्पादों में होता है उपयोग
- धूप, अगरबत्ती और पूजन सामग्री में भी मांग
- पेड़ों की संख्या सीमित होने से उपलब्धता कम
- बाजार में कीमत सामान्य लकड़ी से कई गुना अधिक
- तस्करों के निशाने पर रहती है चंदन की लकड़ी