बाराबंकी। अर्जेंटीना में आगामी 23 अगस्त से होने वाले आठ दिनी वर्ड ट्रांसप्लांट गेम-2015 में खेलने जा रहे बैडमिंटन खिलाड़ी बलबीर सिंह की जिंदगी धूप छांव जैसी है, लेकिन पिता की मौत के बाद से इस बैडमिंटन खिलाड़ी की जिंदगी संघर्षों भरी रही है। छोटी सी उम्र से ही इसने कई उतार-चढ़ाव देखे। हालात यह बने कि किडनी खराब होने पर इलाज के लिए लखनऊ में बना मकान भी बेचना पड़ा, लेकिन इस होनहार खिलाड़ी ने हार नहीं मानी। इस खिलाड़ी ने हिम्मत जुटाई तो और भी हाथ मदद के लिए आगे आए। अब यह होनहार खिलाड़ी अर्जेंटीना की जमीन पर देश का झंडा बुलंद करने का सपना लिए अपने अभ्यास के लिए कड़ी मेहनत में जुटा है।
नगर कोतवाली क्षेेत्र के मोहल्ला श्रावस्तीनगर (लखपेड़बाग) निवासी बलबीर सिंह ग्राम विकास विभाग में कार्यरत हैं। वर्ष 2003 में पिता आरबी सिंह का साया सिर से उठने के बाद पूरे घर की जिम्मेदारी सिर आ पड़ी। पिता के स्थान पर बलबीर को नौकरी मिली। वर्ष 2006 में लखनऊ में पहली शादी हुई, लेकिन पत्नी से वैचारिक मतभेद के चलते यह साथ लंबे समय तक नहीं चल सका।इसी दौरान बेटे शौर्य का जन्म हुआ। इसी बीच पता चला कि बलबीर की किडनी खराब है। इस बीमारी का नाम सुनते ही लगा कि अब सब कुछ समाप्त हो गया, लेकिन ऐसे समय में परिवार व दोस्तों ने पूरा साथ दिया। किडनी आपरेशन को मदद के लिए पेपर में विज्ञापन दिया। इस पर एक दानदाता सोमनाथ मालू सामने भगवान बन कर आए। उन्होंने अपनी किडनी दी, लेकिन ट्रांसप्लांट के लिए कोलकाता के डॉक्टरों ने दस लाख का खर्चा बताया। इसके लिए बैंक लोन लिया। छोटे भाई जगवीर ने काफी आर्थिक मदद की। कई दोस्तों ने भी आर्थिक सहायता दी। इस सबके बीच कर्ज से काफी दब गया था। कर्ज उतारने के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित मकान को बेचना पड़ा जिससे आर्थिक तंगी से जूझना पड़ा। बैडमिंटन का अच्छा खिलाड़ी रहा। अभी भी निरंतर अभ्यास जारी है। इसी बीच अर्जेंटीना में 23 अगस्त से होने वाले आठ दिनी वर्ड ट्रांसप्लांट गेम-2015 में चयन हो गया, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते इस गेम में जाने की सारी उम्मीदें टूट गईं थीं। ऐसे में राज्यमंत्री अरविंद सिंह गोप, जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा व पुलिस अधीक्षक अब्दुल हमीद ने आर्थिक मदद कर सपनों को पंख दे दिए। अंतरराष्ट्रीय स्तर के गेम में जाने की खबर से पूरा घर उत्साहित है।