बाराबंकी। सरकारी अस्पतालों मेें तैनात आयुष के डाॅक्टर मरीजों को सिर्फ सलाह देकर लाैटा रहे हैं क्योंकि ज्यादातर अस्पतालों में आयुष की दवाएं खत्म हो चुकी हैं। पिछले एक साल से दवाओं की खरीद न होने से संकट और ज्यादा बढ़ गया है। जिम्मेदार बजट न होने की बात कहकर हाथ खड़े कर रहे हैं। इसका खामियाजा अस्पताल आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है और वह निजी डॉक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हैं।
नेशनल हेल्थ मिशन के तहत सीएचसी पीएचसी पर आयुष के 32 चिकित्सकों की तैनाती है। यहां पर आने वाले मरीजों को दवाएं आसानी से उपलब्ध हो सके इसके लिए मिशन के तहत करीब 16 लाख रुपये की दवाओं की खरीद प्रतिवर्ष की जाती रही है। लेकिन पिछले एक साल से इन दवाओं की खरीद नहीं की जा सकी है जिससे कई अस्पतालों में दवाएं पूरी तरह से खत्म हो गई हैं या फिर खत्म होने की कगार पर हैं। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मथुरानगर सीएचसी पर तैनात डॉक्टर सौरभ गुप्ता ने बताया कि पिछले साल मार्च में दवाएं आई थी ज्यादातर दवाएं खत्म हो गई है, डिमांड मुख्यालय को भेजी गई है। अस्पतालों में तैनात डॉक्टरों का कहना है कि दवाएं न होने के कारण जो मरीज आते हैं उन्हें सिर्फ सलाह दी जा रही है।
डॉक्टर मिले न दवाएं
हैदरगढ़ कस्बा निवासी शालिनी सिंह ने बताया कि कई दिनों से बुखार है और खांसी भी आ रही है। सीएचसी पर जब दिखाने पहुंची तो यहां पर आयुष का कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला और न ही दवाएं मिली। सायमा यासमीन ने बताया कि जब सीएचसी पर डॉक्टर और दवाएं नहीं मिली तो हम लोगों ने निजी चिकित्सक को जाकर दिखाएं जिसने करीब 500 रुपये की दवाएं बाहर से लिख दी। सीएचसी मथुरानगर पर पत्नी की दवा लेने आए सुशील ने बताया कि डक्टर ने देख तो लिया परन्तु दवाएं न होने के कारण सलाह देकर लौटा दिया।
सीएचसी, पीएचसी पर एनएचएम के तहत आयुष के डॉक्टर तैनात हैं। यहां पर आने वाले मरीजों के लिए मिशन के तहत प्रतिवर्ष दवाओं की खरीद की जाती रही है। परंतु इस वर्ष अभी तक इसके लिए कोई पैसा नहीं मिला है। अफसरों को बताया है।
डॉ. डीके श्रीवास्तव, प्रभारी सीएमओ