बाराबंकी। जिला अस्पताल में संचालित आयुष अस्पताल में दो साल से आयुर्वेदिक दवाएं नहीं हैं, जिसके चलते यहां पर आने वाले मरीजों को सलाह देकर वापस किया जा रहा है। वहीं कुछ मरीज ऐसे भी हैं जो बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं। लेकिन जिम्मेदार इसको लेकर गंभीर नहीं हैं, जिससे यहां पर आने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में चल रहे आयुष अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 40 से 50 मरीज देखे जा रहे हैं। लेकिन इन्हें यहां से मिलने वाली अविपातिकर चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, सीतोपालदी चूर्ण, सुदर्शन चूर्ण, अर्जुन चूर्ण, आगंतुंदीवटी, चंद्रप्रभा वटी, पूर्नवामंदुर, कुटकाघन वटी, धरती लोह, गोदंती भस्म, शंख भस्म, अर्जुनारिष्ट, अशोकारिष्ट, कुर्मायाशव, दष्मूलारिष्ट, आनंद भैरवा रस, लाशूंदीवटी, कंचनार गुगूल, त्रिफला गुगूल, योगराज गुगूल, गिलोयघनवटी, पाइल तरुज, कैल्शियम टेबलेट, आयरन टेबलेट समेत कई प्रकार की दवाएं उपलब्ध ही नहीं हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब दो साल से स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयुष अस्पताल में इन दवाओं को उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके चलते ओपीडी में आने वाले मरीजों को यहां पर तैनात डॉक्टर सिर्फ सलाह देने तक ही सीमित हैं। अस्पताल से दवा न मिलने से मरीज निराश होकर लौट रहे हैं या फिर बाहर से दवा खरीद कर खाने को मजबूर हैं।
दवाएं नहीं, सिर्फ मिल रही सलाह
आयुष अस्पताल में दवा लेने आईं सिविल लाइन निवासी आकांक्षा ने बताया कि उन्हें यहां से सिर्फ सलाह मिली है, दवाएं नहीं मिलीं। वहीं, गोकुलपुर निवासी सीमा ने बताया कि सर्दी, जुकाम, बुखार होने पर दवा लेने आई थीं, परंतु यहां से दवाएं नहीं मिली। चिकित्सक की सलाह पर कई दवाएं बाहर से लेनी पड़ीं।
जिला अस्पताल में संचालित आयुष अस्पताल में दवाएं न होने के संबंध में जानकारी है। लेकिन लंबे समय से शासन स्तर से दवाओं की खरीद के लिए कोई बजट नहीं भेजा जा रहा है, जिसके चलते दिक्कतें आ रही हैं। शासन को इस समस्या से अवगत कराया जाएगा।
- डॉ. डीके श्रीवास्तव, नोडल, एसीएमओ